Chaturmas 2026: देवशयनी एकादशी के दिन योगनिद्रा में क्यों जाते हैं भगवान विष्णु? दो कारण हैं विशेष
TV9 Bharatvarsh July 17, 2026 11:43 PM

Chaturmas 2026: सनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व है. ये चार महीनों का समय होता है. चातुर्मास की शुरुआत हर साल आषाढ़ माह की देवशयनी एकादशी से होती है और इसका समापन कार्तिक माह की देवउठनी एकादशी के दिन होता है. चातुर्मास वो समय होता है, जिसमें जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु संसार के काम से मुक्त होकर योगनिद्रा में चले जाते हैं. चातुर्मास को देवताओं का शयनकाल कहा जाता है.

चूंकि, इस समय भगवान विष्णु विश्राम करते हैं, इसलिए चातुर्मास की अवधि में शादी-विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन आदि जैसे शुभ और मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं. ये समय सांसारिक सुखों से दूर रहने का होता है. चातुर्मास का समय पूजा-पाठ, जप, जप और साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है. इस साल देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को है. इसी दिन चातुर्मास प्रारंभ हो रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवन देवशयनी एकादशी के दिन योगनिद्रा में क्यों जाते हैं? इसके दो विशेष कारण हैं. आइए जानते हैं.

योगनिद्रा की प्रचिलित कथा

भगवान विष्णु की योगनिद्रा से जुड़ी एक अत्यंत प्राचीन कथा के अनुसार, भगवान ने अपने वामन अवतार में दैत्यराज बलि से तीन पग भूमि मांगी थी और फिर पहले पग में धरती, दूसरे पग में पूरा आकाश माप लिया था. जब भगवान ने तीसरा पग रखने के लिए राजा बलि से पूछा तो उन्होंने अपना सिर आगे कर दिया. बलि की भक्ति और उदरता से वामन रूप में भगवान विष्णु बहुत प्रसन्न हुए. फिर भगवान विष्णु अपने असली रूप में आ गए.

राजा बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्री हरि ने उनको पाताल लोक में निवास दिया और वहां का राजा बना दिया. साथ ही भगवान ने कहा कि वो स्वयं पाताल लोक के द्वारपाल बनेंगे. इसके बाद भगवान राजा बलि के साथ पाताल लोक चले गए. इधर वैकुंठ धाम में भगवान के न होने से वहां की व्यवस्था प्रभावित होने लगी. फिर माता लक्ष्मी ने राजा बलि से निवेदन किया कि वो भगवान विष्णु को वैकुंठ जाने दें. राजा बलि ने माता लक्ष्मी की बात मान ली.

साथ ही उन्होंने भगवान से कहा कि वो चार माह पाताल लोक में निवास करें. भगवान विष्णु ने राजा बलि की प्रार्थना स्वीकार कर ली. तभी से भगवन विष्णु चार माह के लिए पाताल लोक में जाकर विश्राम करते हैं. फिर योगगिद्रा से जागकर देवउठनी एकादशी के दिन वैकुंठ धाम वापस लौटते हैं.

प्रकृति के सृजन और संतुलन का समय

धार्मिक मान्यता है कि भगवान चार माह के लिए योगनिद्रा में इसलिए लीन होते हैं, क्योंकि संसार अपने आप में संतुलन स्थापित कर सके. ब्रह्मा जी ने इस संसार का निर्माण किया है. विष्णु जी इसका पालन करते हैं और शिव जी इसके संहारक माने जाते हैं. वर्षा ऋतु के समय प्रकृति नए रूप में जीवित होती है. इस समय प्रकृति में हरियाली और नयापन आता है. ऐसे में भगवान विष्णु का विश्राम करना संसार को दोबारा सृजन और संतुलन का मौका देता है. भगवान की योगनिद्रा आत्मशुद्धि और प्राकृतिक चक्र की निरंतरता का प्रतीक है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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