कोकिला व्रत कब ? मां पार्वती ने कोयल रूप क्यों धारण किया, जानें महत्व और डेट
जागृति सोनी बरसले July 18, 2026 03:42 AM

Kokila Vrat 2026: सुहाग की सलामती और अच्छे जीवनसाथी की कामना से हरियाली तीज का खास महत्व है लेकिन उससे पहले आषाढ़ पूर्णिमा पर कोकिला व्रत किया जाता है. इस बार कोकिला व्रत 28 जुलाई 2026 को है. कोकिला व्रत का वर्णन स्कन्द पुराण, भविष्योत्तर पुराण, निर्णय सिंधु, धर्मसिन्धु ग्रंथ में मिलता है.

मध्यप्रदेष, राजस्थान, गुजरात में मुख्य रूप से कोकिला व्रत किया जाता है. कुछ क्षेत्रों में, यह व्रत आषाढ़ पूर्णिमा से श्रावण पूर्णिमा तक एक माह की अवधि के लिये किया जाता है. शिव-पार्वती की कृपा पाने के लिए स्त्रियों को इस दिन क्या करना चाहिए, कैसे कोकिला व्रत किया जाता है आइए जानते हैं.

कोकिला व्रत मुहूर्त

आषाढ़ पूर्णिमा 28 जुलाई 2026 को शाम 6.18 से शुरू होगी और अगले दिन 29 जुलाई 2026 को रात 08 बजकर 05 मिनट तक रहेगी. 

  • कोकिला व्रत में प्रदोष काल पूजा मुहूर्त - रात 7.15 - रात 9.20

कोकिला व्रत क्यों करते हैं

कोकिलारूपमास्थाय या देवी गिरिजा पुरा।

तपस्तेपे महादेवं प्राप्य सौभाग्यमुत्तमम्॥

स्कंद पुराण में बताए इस श्लोक के अनुसार प्राचीन काल में देवी गिरिजा यानी पार्वती ने कोकिला रूप धारण कर भगवान महादेव को प्राप्त करने के लिए तप किया और उत्तम सौभाग्य प्राप्त किया.

ज्योतिषाचार्य नीतिका शर्मा के अनुसार पुराणों में कहा गया है कि जो स्त्रियां आषाढ़ पूर्णिमा पर कोकिला व्रत करती है उन्हें अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख, पति की दीर्धायु और मनचाहा वर प्राप्त होता है. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ साधन माना गया है.

पति वियोग नहीं सहना पड़ता

धार्मिक मान्यता है कि जो महिलाएं पूरे विधि-विधान और श्रद्धा से कोकिला व्रत करती हैं, उनका सुहाग अखंड बना रहता है. उन्हें पति वियोग का दुख नहीं झेलना पड़ता और वे सौभाग्यवती रहने का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं.

कोकिला व्रत कैसे करें

  • कोकिला व्रत में महिलाएं पूरे व्रत काल के दौरान शुद्धता का विशेष ध्यान रखती हैं. परंपरा के अनुसार प्रतिदिन औषधीय जड़ी-बूटियों युक्त जल से स्नान करना शुभ माना जाता है.
  • व्रत के समय सात्विक जीवनशैली अपनाई जाती है. महिलाएं अनाज, मांसाहार और तीखे मसालों का त्याग करती हैं तथा फल, दूध, कंद-मूल और अन्य फलाहारी पदार्थों का सेवन करती हैं.
  • पूजा के लिए मिट्टी से कोयल (कोकिला) की प्रतिमा बनाई जाती है. यह प्रतिमा देवी पार्वती के प्रतीक रूप में स्थापित की जाती है.
  •  पुष्प, वस्त्र और श्रृंगार सामग्री से सजाकर विधि-विधान से पूजा करें. साथ ही भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान एवं कोकिला व्रत कथा का श्रवण करें.
  • पूजा और आरती के बाद मिट्टी से बनी कोयल की प्रतिमा श्रद्धापूर्वक ब्राह्मण या अपने सास-ससुर को दान की जाती है. इसे व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

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