अमेरिका और ईरान ने शुक्रवार को मिडिल ईस्ट में एक-दूसरे पर हमले तेज कर दिए. होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जे की लड़ाई के बीच, दोनों देशों ने एक-दूसरे के इंफ्रास्ट्रक्चर और मिलिट्री ठिकानों को निशाना बनाया. अमेरिका ने ईरान के और पुलों और एनर्जी साइट्स पर हमले किए और ईरान के एक अहम बंदरगाह पर बने टावर को गिरा दिया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान पर दबाव बनाने के लिए ये कदम उठाए, ताकि दुनिया की एनर्जी सप्लाई के लिए जरूरी इस जलमार्ग पर ईरान की पकड़ ढीली हो सके.
इसके जवाब में, ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगी देशों पर मिसाइलें दागीं. इनमें कतर (जो युद्ध में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है) और कुवैत शामिल हैं. कुवैत में एक वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट (खारे पानी को मीठा बनाने वाला प्लांट) को नुकसान पहुंचा.
होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण के लिए संघर्षइस इलाके में कई दिनों से लगातार हमले हो रहे हैं और यह संघर्ष मुख्य रूप से होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण के लिए है. अस्थायी युद्धविराम खत्म होने के बाद, चार महीने से ज़्यादा समय से चल रहे इस युद्ध का कोई साफ अंत नजर नहीं आ रहा है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने शुक्रवार देर रात कहा कि उसने ईरान की मिलिट्री ताकत को कमजोर करने के मकसद से लगातार सातवीं रात हमले किए.
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि हालिया अमेरिकी हमलों में दर्जनों लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं. शुक्रवार को भी नए हताहतों की खबर मिली, और अमेरिकी सेना ने भी अपने और सैनिकों के घायल होने की बात मानी.
होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या कमU.S. Central Command tweets, “CENTCOM launched a round of strikes against Iran at 3 p.m. ET today for the seventh consecutive night. The strikes are designed to continue degrading Iranian military capabilities at the Commander in Chief’s direction” pic.twitter.com/0JF6QxLLUb
— ANI (@ANI) July 17, 2026
28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा युद्ध शुरू करने के बाद ईरान ने शिपिंग ट्रैफिक के लिए होर्मुज को असल में बंद कर दिया था. इससे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और ईरान को बातचीत में मजबूत स्थिति मिली. एक इंटरनेशनल शिपिंग ट्रैकर के अनुसार, शुक्रवार को तेल की कीमत 86 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जो एक महीने में सबसे ऊंचे स्तर के करीब है, क्योंकि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या तीन हफ्ते के निचले स्तर पर आ गई है.
लंबे संघर्ष से बचने का राजनीतिक दबावगुरुवार शाम अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए ट्रंप ने जोर देकर कहा कि युद्ध अच्छी तरह से चल रहा है. उन्होंने कहा कि हम ईरान में भी बड़ी जीत हासिल कर रहे हैं और आपको उस मेहनत का फल बहुत जल्द देखने को मिलेगा. युद्ध शुरू होने से पहले, अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उससे बातचीत कर रहा था. अब ट्रंप पर युद्ध को खत्म करने और मिडिल ईस्ट में उस तरह के लंबे संघर्ष से बचने का राजनीतिक दबाव है, जिसके खिलाफ उन्होंने चुनाव प्रचार किया था.
ईरान में पुलों और ‘बिजली के बुनियादी ढांचे’ पर हमलेईरानी सरकारी टेलीविजन की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार की रात अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी होर्मोजगन प्रांत में पुलों पर हवाई हमले किए. इन हमलों में होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के तट पर स्थित शहर बंदर खमीर को निशाना बनाया गया. ऐसा लगता है कि हाईवे और रेलवे पुलों पर किए गए हमलों का मकसद ईरान के मुख्य बंदरगाह, बंदर अब्बास का संपर्क उन सड़कों से काटना था जो इस्लामिक गणराज्य के मध्य क्षेत्र और वहां से राजधानी तेहरान तक जाती हैं.
ईरान ने शुक्रवार को पहली बार अमेरिकी हवाई हमलों के दौरान बिजली के बुनियादी ढांचे पर हमलों की बात मानी, जब उसके ऊर्जा मंत्रालय ने दक्षिणी प्रांतों में लोगों से कम बिजली इस्तेमाल करने को कहा, जहां भीषण गर्मी पड़ रही थी. मंत्रालय ने यह नहीं बताया कि किस चीज को निशाना बनाया गया था.
अमेरिकी हमलों में 46 लोगों की मौतईरानी अधिकारियों ने बताया कि हाल के अमेरिकी हमलों में कम से कम 46 लोग मारे गए हैं और 400 से ज़्यादा घायल हुए हैं. इनमें शुक्रवार को एक पुल पर हुए हमले में मारे गए आठ लोग भी शामिल हैं. अमेरिकी अधिकारियों ने माना कि सोमवार से अब तक 13 और अमेरिकी सैनिक – 10 सेना के जवान और तीन नौसेना के नाविक – घायल हुए हैं, लेकिन उन्होंने कोई और जानकारी नहीं दी. युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 14 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और 427 घायल हुए हैं.
US के हमले में अहम बंदरगाह का टावर गिरासेंट्रल कमांड ने कहा कि शुक्रवार को हवाई हमलों में उसने दर्जनों सैन्य और सैन्य बुनियादी ढांचे वाले ठिकानों को निशाना बनाया. सरकारी समाचार एजेंसी IRNA की रिपोर्ट और बाद में अमेरिकी सेना की पुष्टि के अनुसार, इन हमलों में ओमान की खाड़ी में स्थित ईरान के चाबहार बंदरगाह का एक टावर गिर गया. यह बंदरगाह जमीन से घिरे पड़ोसी देश अफगानिस्तान के लिए व्यापार का एक अहम रास्ता है.
कमर्शियल जहाजों पर नजर रखने का कामचाबहार बंदरगाह, जिसे ईरान भारत की मदद से चला रहा था, अमेरिकी हवाई हमलों का बार-बार निशाना बनता रहा है. ईरान का कहना है कि यह टावर बंदरगाह पर आने-जाने वाले कमर्शियल जहाजों पर नजर रखने का काम करता है. लेकिन सेंट्रल कमांड का कहना है कि यह समुद्री निगरानी नेटवर्क का हिस्सा था, जिसका इस्तेमाल ईरान का अर्धसैनिक बल ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों को ट्रैक करने और निशाना बनाने के लिए करता था.
ईरान ने कतर को बनाया निशानाशुक्रवार को कतर ने दो बार लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने की चेतावनी दी, क्योंकि ईरानी मिसाइलों ने देश को निशाना बनाया. लोगों ने अपने ऊपर धमाकों की आवाज सुनी, जब मिसाइलों को रोकने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम ने जवाबी कार्रवाई की. कतर के गृह मंत्रालय ने बताया कि गिरते मलबे की चपेट में आने से एक बच्चा घायल हो गया.
बहरीन और कुवैत को भी बनाया निशानापाकिस्तान के साथ-साथ कतर भी ईरान युद्ध को खत्म करने की कोशिशों में एक अहम मध्यस्थ है. ईरान ने शुक्रवार तड़के बहरीन और कुवैत को भी निशाना बनाया. कुवैत में अधिकारियों ने बताया कि ईरान ने बिजली और पानी के डिसेलिनेशन प्लांट (खारे पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट) पर हमला किया, जिससे स्टेशन को भारी नुकसान पहुंचा. देश का लगभग 90 प्रतिशत पीने का पानी डिसेलिनेशन से ही मिलता है.
कुवैत ने कहा कि उसने आग बुझा दी है और नुकसान का आकलन करने तथा स्टेशन को फिर से चालू करने के लिए काम कर रहा है. जॉर्डन की सेना ने बताया कि उसने शुक्रवार सुबह ईरान द्वारा दागी गई तीन मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया.
इरबिल और सुलेमानिया में धमाकों की आवाजशुक्रवार सुबह उत्तरी इराक के अर्ध-स्वायत्त कुर्द इलाके में इरबिल और सुलेमानिया में धमाकों की आवाज सुनी गई, क्योंकि एयर डिफेंस सिस्टम ने आने वाले हमलों को निशाना बनाया. सुरक्षा कारणों से नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि यह हमला जाहिर तौर पर ईरानी कुर्द विद्रोही समूह ‘कोमाला’ को निशाना बनाकर किया गया था, जिसमें कम से कम नौ लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए.