नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने नीट यूजी परीक्षा का रिजल्ट 16 जुलाई को जारी कर दिया है. वहीं इस बार परीक्षा में 11.21 लाख से ज्यादा उम्मीदवार सफल हुए हैं. अब रिजल्ट आने के बाद बड़ा सवाल यही आ रहा है कि ऑल इंडिया रैंक के आधार पर स्टूडेंट्स को कौन सा मेडिकल कॉलेज मिल सकता है और सरकारी एमबीबीएस सीट मिलने की संभावना कितनी है. हालांकि अंतिम सीट आवंटन केवल रैंक से तय नहीं होता, बल्कि इसमें कैटेगरी, राज्य कोटा, सीटों की उपलब्धता, काउंसलिंग राउंड और उम्मीदवारों की कॉलेज प्राथमिकताएं भी बड़ी भूमिका निभाती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि सरकारी या प्राइवेट किस रैंक पर कौन सा मेडिकल कॉलेज मिल सकता है.
मेडिकल कॉलेज में एडमिशन केवल अंकों के आधार पर नहीं होते, बल्कि ऑल इंडिया रैंक और दूसरे मानक भी इसमें मायने रखते हैं. काउंसलिंग के दौरान उम्मीदवार की कैटेगरी, राज्य का डोमिसाइल, आरक्षण नियम, सीट मैट्रिक्स और पसंदीदा कॉलेज की लिस्ट को भी ध्यान में रखा जाता है. यही वजह है कि समान अंक होने के बावजूद अलग-अलग राज्य और कैटेगरी के उम्मीदवारों को अलग-अलग कॉलेज मिल सकते हैं.
नेशनल मेडिकल काउंसिल के अनुसार 2026 के लिए देश भर में 1,36,939 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध है. इनमें 63,296 सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेज में जबकि 73,643 सीटें प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में है. इस वर्ष एडमिशन पिछले साल की तुलना में कुल 9,911 नई एमबीबीएस सीटें जोड़ी गई है, जिनमें सरकारी और मेडिकल दोनों इंस्टीट्यूट की सीटें शामिल है. वहीं एमसीसी के माध्यम से 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा एमबीबीएस और बीडीएस सीटों के अलावा एम्स जेआईपीएमईआर, बीएचयू, एएमयू, ईएसआईसी, केंद्रीय विद्यालय, डीम्ड यूनिवर्सिटी और कुछ बीएससी नर्सिंग इंस्टीट्यूट की सीटों पर भी काउंसलिंग कराई जाएगी. वहीं विशेष सरकारी मेडिकल कॉलेज की 85 प्रतिशत सीटों के लिए अलग राज्यों की काउंसलिंग एजेंसियां प्रक्रिया पूरी करेगी.