आधुनिक फुटबॉल इतिहास में कुछ ही अंतरराष्ट्रीय टीमें ऐसी रही हैं जिन्होंने प्रशंसकों की कल्पना को जैक चार्लटन की 1990 के दशक की शुरुआत की रिपब्लिक ऑफ आयरलैंड टीम की तरह मोहित किया हो।
लीड्स यूनाइटेड के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी जैक चार्लटन के नेतृत्व में आयरलैंड ने 1990 में अपने पहले विश्व कप के लिए क्वालिफाई किया था और इटली में क्वार्टर-फाइनल तक पहुंचकर इतिहास रचा था। चार साल बाद 1994 में अमेरिका में उन्होंने फिर से अंतिम आठ में जगह बनाकर यह साबित कर दिया कि पिछली सफलता कोई संयोग नहीं थी।
फॉरवर्ड टोनी कसकारिनो उस टीम के अहम सदस्य थे और वे बताते हैं कि उन दोनों टूर्नामेंटों की उनकी सबसे गहरी यादें उनके कोच चार्लटन की विशाल व्यक्तित्व से जुड़ी हैं।
कसकारिनो ने 'फोरफोरटू' से बातचीत में कहा, “टीम के लड़के कमाल के थे और मैनेजर 'बिग जैक' तो बेहद मज़ेदार इंसान थे।”
खिलाड़ी के रूप में जैक चार्लटन अपने कठोर खेल शैली और अपने प्रसिद्ध ‘लिटिल ब्लैक बुक’ के लिए जाने जाते थे। बतौर कोच भी उनका तरीका पुरानी पीढ़ी जैसा ही सख्त और अलग था।
कसकारिनो हँसते हुए बताते हैं, “अगर आप मैच से एक रात पहले डिनर पर कोक पी रहे होते, तो वे तुरंत बोल पड़ते — ‘ये क्या बकवास है? मैं चाहूँगा तुम बीयर पियो।’”
चार्लटन के मुताबिक, खिलाड़ियों को खेल वैज्ञानिकों और पोषण विशेषज्ञों के तरीकों से थोड़ा हटकर चलना चाहिए। कसकारिनो बताते हैं, “उनका मानना था कि इससे नींद बेहतर आती है।”
यहां तक कि जब दांव सबसे बड़ा था — आयरलैंड फुटबॉल इतिहास के सबसे अहम मैच की पूर्वसंध्या पर — तब भी चार्लटन अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे।
कसकारिनो याद करते हैं, “उन्होंने इटली के खिलाफ 1990 के इटालिया विश्व कप के क्वार्टर-फाइनल से पहले भी यही तरीका अपनाया था। उन्होंने कहा था, ‘देखो, तुम रोम में इटली के खिलाफ खेल रहे हो। रेफरी तुम्हें कुछ नहीं देगा, और कल तुम घर लौटोगे, तो क्यों न एक ड्रिंक ले लो।’ वह हम पर से दबाव हटाना चाहते थे।”
चार्लटन की यह विनम्र लेकिन अनोखी सोच उनके खिलाड़ियों के बीच भाईचारे की भावना को मजबूत करने में अहम रही। कसकारिनो आज भी उस दौर को बेहद स्नेह और गर्व के साथ याद करते हैं, जब आयरलैंड की टीम ने दुनिया को चौंका दिया था।