विश्व कप के एक भी पल को मिस न करें
देखें: स्पेन की 16 साल में पहली विश्व कप जीत के बाद मैदान पर तनाव बढ़ा और अर्जेंटीना के मैनेजर लियोनेल स्कालोनी को झगड़ा शांत कराने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।
स्पेन और अर्जेंटीना के बीच हुआ विश्व कप फाइनल एक बेहद उग्र मुकाबला साबित हुआ। जैसे ही अंतिम सीटी बजी और 'ला रोजा' को चैंपियन घोषित किया गया, कई 'ला अल्बिसेलेस्टे' खिलाड़ियों ने विरोधी टीम के खिलाड़ियों से भिड़ने की कोशिश की। अर्जेंटीना के कोच लियोनेल स्कालोनी को मैदान पर उतरकर कई झगड़ों को शांत करना पड़ा।
शुरू से ही विवादास्पद मैच
स्पेन और अर्जेंटीना के बीच हुए इस फाइनल में लगभग 50 फाउल दर्ज किए गए। 'ला अल्बिसेलेस्टे' टीम को चार पीले कार्ड मिले और स्टार खिलाड़ी एंज़ो फर्नांडीज़ को अतिरिक्त समय के अंतिम सेकंडों में बाहर भेज दिया गया। यह दिखाता है कि मैच कितना शारीरिक और आक्रामक था, जिसमें खेल की सुंदरता के बजाय कठोर टक्करें देखने को मिलीं।
अंतिम सीटी के बाद, कई अर्जेंटीना खिलाड़ी अपने विरोधी दल की ओर दौड़े, लेकिन स्कालोनी ने स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए बीच में आकर हस्तक्षेप किया।
देखें झगड़े के दृश्य
मैच समाप्त होते ही मैदान पर अफरा-तफरी मच गई और झगड़ा शुरू हो गया।
यह रहा एक और एंगल।
हताशा का कारण
अर्जेंटीना की आक्रामक खेल शैली स्कालोनी की टीम के लिए किसी भी आक्रामक सफलता में नहीं बदली। उन्होंने 105 मिनट तक एक भी शॉट नहीं लिया और 120 मिनट के बाद भी केवल दो शॉट लगाए – जिनमें से कोई भी लक्ष्य पर नहीं था। पूरी प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने स्पेन के बॉक्स में सिर्फ आठ बार गेंद को छुआ।
इसके विपरीत, 'ला रोजा' ने 20 शॉट लगाए – जिनमें से 12 लक्ष्य पर थे – और विपक्षी बॉक्स में 31 बार गेंद को छुआ।
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स्पेन अब अपनी 2010 के बाद पहली विश्व कप ट्रॉफी का जश्न मना रहा है। दूसरी ओर, अर्जेंटीना के लिए सवाल बना रहेगा कि क्या महान खिलाड़ी लियोनेल मेस्सी राष्ट्रीय टीम के साथ अपना करियर जारी रखेंगे।