Saudi Arabia Maritime Embargo: मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण पहले ही कई बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए जा चुकें हैं. ऐसे में अगर एक बार फिर पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी होती है, तो इसका असर एक बार फिर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा. मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई है. यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया है.
इस नाकाबंदी के चलते समुद्र के रास्ते होने वाली तेल और सामान की सप्लाई पर असर पड़ सकता है. अगर ऐसा ही रहा तो कुछ ही समय में इसका सबसे ज्यादा असर पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों पर पड़ सकता है और फिर आने वाले कुछ दिनों में पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
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इस रास्ते से आता है कच्चा तेल
दरअसल, लाल सागर से ही बड़ी मात्रा में कच्चा तेल समेत कई सामान दूसरे देशों तक पहुंचाया जाता है. गाजा युद्ध के दौरान हूती विद्रोहियों ने लाल सागर और अदन की खाड़ी में कई जहाजों को निशाना बनाया था. अहम बात यह है कि इसी रास्ते में सऊदी अरब का यानबू बंदरगाह भी है और यहीं से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात किया जाता है. यही वजह है कि अगर आने वाले समय में इस रास्ते पर तनाव बढ़ता है तो इसका असर तेल की सप्लाई पर पड़ेगा.
नाकाबंदी करने का फैसला क्यों लिया गया?
इस पर हूती विद्रोहियों का कहना है कि यह कदम उन्होंने सऊदी अरब की कार्रवाई के जवाब में उठाया है. उन्होंने यह आरोप लगाया है कि सऊदी अरब ने उनके बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर रोक लगाई हुई है और अगर समय रहते सऊदी अरब ने कोई कार्रवाई नहीं की तो इसका जवाब पहले से ज्यादा कड़े तरीके से दिया जाएगा.ऐसे में अब कई लोगों के मन में एक सवाल आना स्वाभाविक है कि क्या आने वाले दिनों में सच में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं?
पेट्रोल-डीजल के दाम में होगी बढ़ोतरी?
बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला समुद्री रास्ता है. लाल सागर के इस समुद्री रास्ते से ही सऊदी अरब समेत खाड़ी क्षेत्र से कच्चा तेल और अन्य सामान दुनिया के कई देशों तक पहुंचाया जाता है. अब यह बात तो साफ है कि अगर इस रास्ते पर तनाव बढ़ता है तो जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है. साथ ही कच्चे तेल की सप्लाई पर भी इसका असर पड़ सकता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा सकती है और फिर आगे चलकर पेट्रोल-डीजल और गैस की दाम बढ़ सकते हैं.
क्या इसका असर भारत पर पड़ेगा या नहीं?