सेंसेक्स 443 अंक टूटा, निफ्टी 24,240 के नीचे बंद; बैंकिंग शेयरों में बिकवाली से बाजार पर दबाव | Cliq Latest
Cliq India July 21, 2026 10:42 PM

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 442.93 अंक यानी 0.57 प्रतिशत गिरकर 77,708.52 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 95.80 अंक यानी 0.39 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,238.50 पर बंद हुआ। इस गिरावट के साथ निफ्टी महत्वपूर्ण 24,240 के स्तर से नीचे फिसल गया।

कारोबार के दौरान बाजार पर सबसे अधिक दबाव बैंकिंग शेयरों में हुई तेज बिकवाली का रहा। एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक के तिमाही नतीजों के बाद निवेशकों ने मार्जिन और भविष्य की आय को लेकर चिंता जताई, जिसके चलते दोनों शेयरों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं, जिससे महंगाई, रुपये और कॉर्पोरेट मुनाफे को लेकर निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।

हालांकि दिनभर की कमजोरी के बावजूद कुछ रक्षात्मक और उपयोगिता क्षेत्र की कंपनियों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार अपने निचले स्तरों से कुछ संभलने में सफल रहा।

बैंकिंग शेयरों ने बाजार को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया

सोमवार की गिरावट में सबसे बड़ी भूमिका बैंकिंग शेयरों की रही। निवेशकों ने निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंकों के शेयरों में जमकर मुनाफावसूली की, जिससे प्रमुख सूचकांकों पर भारी दबाव बना।

एक्सिस बैंक सेंसेक्स का सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा। तिमाही परिणाम घोषित होने के बाद निवेशकों की निराशा के चलते इसका शेयर 5.48 प्रतिशत तक लुढ़क गया।

वहीं एचडीएफसी बैंक के शेयर में भी 5.12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार बैंक के शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) पर दबाव और भविष्य की आय को लेकर बढ़ती चिंताओं ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।

दोनों बैंकों का सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ा वेटेज होने के कारण इनकी गिरावट का सीधा असर पूरे बाजार पर पड़ा।

सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद

30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स कारोबार के दौरान एक समय 77,368.29 के निचले स्तर तक पहुंच गया था, जहां इसमें लगभग एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

बाद में कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी लौटने से बाजार ने नुकसान का कुछ हिस्सा कम किया, लेकिन बैंकिंग शेयरों में लगातार कमजोरी के कारण सूचकांक हरे निशान में वापसी नहीं कर सके।

इसी तरह निफ्टी 50 भी दिनभर दबाव में बना रहा और अंततः 24,238.50 पर बंद हुआ।

बाजार की व्यापक स्थिति भी कमजोर रही और अधिकांश शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। बड़े निवेशकों ने कई दिग्गज कंपनियों में मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी।

मार्जिन को लेकर चिंता से बैंकिंग क्षेत्र पर दबाव

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सोमवार की कमजोरी का मुख्य कारण बैंकिंग क्षेत्र के तिमाही नतीजों को लेकर निवेशकों की निराशा रही।

विशेष रूप से एचडीएफसी बैंक के परिणामों में अनुमान से कमजोर नेट इंटरेस्ट मार्जिन (एनआईएम) ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।

मार्जिन पर दबाव का अर्थ है कि आने वाली तिमाहियों में बैंकों की लाभप्रदता प्रभावित हो सकती है। इसी आशंका के कारण संस्थागत निवेशकों ने बैंकिंग शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम की।

चूंकि बैंकिंग क्षेत्र भारतीय शेयर बाजार का सबसे बड़ा घटक माना जाता है, इसलिए इस क्षेत्र में कमजोरी का असर पूरे बाजार की दिशा पर दिखाई दिया।

अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी वैश्विक अनिश्चितता

घरेलू कारणों के अलावा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों ने भी निवेशकों का विश्वास कमजोर किया।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।

विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए महंगाई, चालू खाते के घाटे और कंपनियों की लागत बढ़ाने का कारण बन सकती हैं।

इसी वजह से निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हुए सावधानीपूर्ण रुख अपनाया।

इन दिग्गज शेयरों में भी रही भारी बिकवाली

एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक के अलावा कई अन्य बड़ी कंपनियों के शेयर भी गिरावट के साथ बंद हुए।

प्रमुख नुकसान उठाने वाले शेयरों में मारुति सुजुकी इंडिया, कोटक महिंद्रा बैंक, इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), महिंद्रा एंड महिंद्रा और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल रहे।

सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल और वित्तीय सेवा क्षेत्र के शेयरों में मुनाफावसूली ने भी बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया।

विश्लेषकों का कहना है कि इस सप्ताह आने वाले अन्य तिमाही नतीजों से पहले निवेशक सतर्क बने हुए हैं।

रक्षात्मक शेयरों ने बाजार को कुछ सहारा दिया

समग्र कमजोरी के बावजूद कुछ बड़े शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।

ट्रेंट, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन, एनटीपीसी और भारती एयरटेल जैसे शेयर सकारात्मक बढ़त के साथ बंद हुए।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों ने अपेक्षाकृत स्थिर आय वाले उपयोगिता और दूरसंचार क्षेत्र की कंपनियों को प्राथमिकता दी।

इन्हीं शेयरों में हुई खरीदारी के कारण सेंसेक्स और निफ्टी अपने दिन के सबसे निचले स्तरों पर बंद होने से बच गए।

कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से रुपये पर भी दबाव

शेयर बाजार की कमजोरी के साथ-साथ भारतीय रुपये में भी गिरावट दर्ज की गई।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ी, जिससे रुपया दो महीने के निचले स्तर तक पहुंच गया।

बाजार सूत्रों के अनुसार अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हस्तक्षेप भी किया, लेकिन वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण रुपये पर दबाव बना रहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रुपये में कमजोरी लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर महंगाई और विदेशी निवेश प्रवाह पर पड़ सकता है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड निवेशकों को मिल रहा मजबूत प्रतिफल

जहां एक ओर शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, वहीं सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) में निवेश करने वालों को बेहतर प्रतिफल मिलता रहा है।

हाल के आंकड़ों के अनुसार कई एसजीबी श्रृंखलाओं ने 34 प्रतिशत से 44 प्रतिशत तक का प्रतिफल दिया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में समय-समय पर गिरावट भी देखने को मिली।

हालांकि कर व्यवस्था में हुए कुछ बदलावों के कारण नए निवेश पहले की तुलना में कुछ कम आकर्षक हो गए हैं, फिर भी वैश्विक अनिश्चितताओं के समय सोना निवेशकों के लिए सुरक्षित निवेश विकल्प बना हुआ है।

हुंडई ने बढ़ाया इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग नेटवर्क

कॉर्पोरेट क्षेत्र से जुड़ी एक अन्य महत्वपूर्ण घोषणा में हुंडई मोटर इंडिया ने बताया कि उसने अपने मायहुंडई मोबाइल एप्लिकेशन में देशभर के लगभग 30,000 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्वाइंट को एकीकृत कर दिया है।

कंपनी ने वर्ष 2030 तक अपने फास्ट चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार कर 600 चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना को भी दोहराया।

विश्लेषकों का मानना है कि इससे इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी।

अब निवेशकों की नजर तिमाही नतीजों पर

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अब निवेशकों का पूरा ध्यान इस सप्ताह आने वाले विभिन्न सूचीबद्ध कंपनियों के तिमाही परिणामों पर रहेगा।

बैंकिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल और विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियों के नतीजे यह संकेत देंगे कि चालू वित्त वर्ष में कॉर्पोरेट आय की स्थिति कैसी रह सकती है।

इसके साथ ही निवेशक अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और मौद्रिक नीति से जुड़े संकेतों पर भी करीबी नजर बनाए रखेंगे।

विश्लेषकों के अनुसार जब तक भू-राजनीतिक तनाव बना रहेगा और कंपनियों के तिमाही परिणाम सामने आते रहेंगे, तब तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी रहेगी।

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