नकली गहनों का कैंसर से खतरा: जानें क्या कहती है रिसर्च
newzfatafat July 22, 2026 12:42 AM
नकली गहनों का खतरा

यह माना जाता है कि नकली गहनों जैसे कि नेकलेस, अंगूठी और झुमके का लंबे समय तक उपयोग करने से कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। हाल ही में एक अध्ययन में यह सामने आया है कि कुछ ऑनलाइन गहनों में कैडमियम की मात्रा मानक से 9,000 गुना अधिक पाई गई है। यह मामला यूके में उजागर हुआ, जहां नकली गहनों में कैडमियम या लेड मिलाने की बात सामने आई। जबकि कैडमियम की अधिकतम सीमा 0.01% निर्धारित की गई है, जांच के परिणाम चौंकाने वाले थे। आजकल ऑनलाइन खरीदारी जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है, जिसमें रोजमर्रा की आवश्यक चीजें जैसे राशन और दवाइयां शामिल हैं, और गहने भी। लेकिन इन गहनों में मिलावट से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। आइए जानते हैं इस रिसर्च के बारे में।


रिसर्च के निष्कर्ष

एक रिपोर्ट में नकली गहनों में कैडमियम की अधिकता का उल्लेख किया गया है। इसमें पाया गया कि कई लोकप्रिय ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर बेची जा रही अंगूठियों, नेकलेस और झुमकों में कैडमियम की मात्रा मानक से 9,000 गुना अधिक थी। यूके के नियमों के अनुसार, नकली गहनों में कैडमियम की मात्रा 0.01% से अधिक नहीं होनी चाहिए।


इस मानक के अनुसार, यदि किसी उत्पाद को "925 सिल्वर" (यानी 92.5% सिल्वर) के रूप में बेचा जाता है, तो उसमें जहरीली धातु की उच्च मात्रा हो सकती है। एक मामले में, "925 सिल्वर" के नाम पर बेची गई अंगूठी में 92% कैडमियम पाया गया। इसी तरह, एक ब्रेसलेट में कैडमियम की मात्रा मानक से 3,300 गुना अधिक थी। इन उत्पादों को जांच के बाद वापस मंगवा लिया गया, लेकिन इस प्रकार की मिलावट का दायरा चिंताजनक है।


कैंसर और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं

यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी के अनुसार, कैडमियम के संपर्क में लंबे समय तक रहने से न केवल कैंसर हो सकता है, बल्कि किडनी और लिवर से संबंधित बीमारियों का भी खतरा बढ़ता है। किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर क्रिस्टर हूगस्ट्रैंड ने बताया कि भारी धातुएं किडनी कैंसर का कारण बन सकती हैं। इसके अलावा, ये लिवर को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ ऑस्टियोपोरोसिस का कारण भी बन सकती हैं, जिससे हड्डियां कमजोर और भंगुर हो जाती हैं।


नकली गहनों के खतरे

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि झुमके जैसे गहने अधिक खतरनाक होते हैं। इसका कारण यह है कि ये कान छिदवाने के बाद सीधे त्वचा के संपर्क में आते हैं, जिससे जहरीली धातुएं शरीर में प्रवेश कर सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में आर्टिफिशियल ज्वेलरी का व्यापक उपयोग होता है, जिससे भारी धातुओं के प्रदूषण का खतरा गंभीर चिंता का विषय बन गया है।


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