मां बनने की राह में सबसे बड़ी रुकावट है फेलोपियन ट्यूब ब्लॉकेज, जानिए इसके शुरुआती लक्षण, मुख्य कारण, जांच और डॉक्टर से सटीक इलाज
Newsindialive Hindi July 22, 2026 02:42 AM

महिला प्रजनन प्रणाली (Female Reproductive System) में फेलोपियन ट्यूब्स एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये दोनों नलियां गर्भाशय (Uturus) को अंडाशय (Ovaries) से जोड़ती हैं। जब हर महीने ओवरी से अंडा (Egg) रिलीज होता है, तो वह फेलोपियन ट्यूब में ही पहुंचता है, जहां पुरुष शुक्राणु (Sperm) के साथ उसका फर्टिलाइजेशन (निषेचन) होता है। यदि इन नलियों में किसी भी प्रकार की रुकावट, सूजन या डैमेज आ जाए, तो अंडा और स्पर्म आपस में मिल नहीं पाते, जिससे गर्भधारण (Pregnancy) असंभव हो जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, महिलाओं में इनफर्टिलिटी या बांझपन के लगभग 25 से 30 प्रतिशत मामलों में फेलोपियन ट्यूब का बंद होना ही सबसे मुख्य कारण पाया जाता है।

ट्यूब बंद होने के मुख्य कारण: इंफेक्शन, पेल्विक सर्जरी और एंडोमेट्रियोसिस

फेलोपियन ट्यूब्स में रुकावट आने के पीछे कई चिकित्सकीय कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID) है, जो आमतौर पर यौन संचारित संक्रमणों (STIs) जैसे क्लेमाइडिया या गोनोरिया के सही समय पर इलाज न होने के कारण होता है। इसके अलावा, भारत में ट्यूबरक्लोसिस यानी पेल्विक टीबी (Pelvic TB) भी ट्यूब ब्लॉकेज का एक बहुत बड़ा कारण है। अन्य कारणों में एंडोमेट्रियोसिस (जिसमें गर्भाशय के अंदरूनी टिशू बाहर उगने लगते हैं), पिछले समय में हुई पेल्विक या एब्डोमिनल सर्जरी, और अस्थानिक गर्भावस्था (Ectopic Pregnancy) का इतिहास शामिल है।

क्या हैं इसके शुरुआती लक्षण और शरीर में दिखने वाले संकेत?

फेलोपियन ट्यूब ब्लॉकेज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके कोई बहुत स्पष्ट या गंभीर लक्षण आसानी से महसूस नहीं होते हैं। अधिकांश महिलाओं को इस समस्या का पता तब चलता है जब वे लंबे समय तक कोशिश करने के बाद भी प्रेग्नेंट नहीं हो पाती हैं। हालांकि, कुछ मामलों में पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया में लगातार हल्का या तेज दर्द महसूस हो सकता है। इसके अलावा, पीरियड्स के दौरान अत्यधिक दर्द होना, भारी ब्लीडिंग होना, संभोग (Intercourse) के समय दर्द महसूस होना और असामान्य वजाइनल डिस्चार्ज होना भी इसके कुछ अप्रत्यक्ष संकेत हो सकते हैं।

सटीक जांच और आधुनिक मेडिकल ट्रीटमेंट: कैसे संभव है मातृत्व?

यदि किसी महिला को गर्भधारण में समस्या आ रही है, तो डॉक्टर्स सबसे पहले एचएसजी टेस्ट यानी हिस्टेरोसाल्पिंगोग्राफी (HSG Test) कराने की सलाह देते हैं। इस एक्स-रे टेस्ट में गर्भाशय के जरिए एक विशेष डाई डाली जाती है, जिससे ट्यूबों के खुले या बंद होने का स्पष्ट पता चल जाता है। इसके अलावा लैप्रोस्कोपी (Laparoscopy) या अल्ट्रासाउंड से भी ब्लॉकेज का सटीक आकलन किया जाता है। इलाज की बात करें तो यदि ब्लॉकेज मामूली है, तो लैप्रोस्कोपिक सर्जरी द्वारा ट्यूब को खोल दिया जाता है। लेकिन यदि ट्यूब्स गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त या बंद हैं, तो आईवीएफ यानी इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से महिलाएं आसानी से मातृत्व का सुख प्राप्त कर सकती हैं।

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