कच्चे तेल की कीमत $91पार, होर्मुज संकट के बाब अल-मंदब में नाकाबंदी का भारतीय आयातकों, निवेशकों और पेट्रोल-डीजल पर आर
et July 22, 2026 10:42 AM
कच्चे तेल की कीमतों में 22 जुलाई 2026 को भी तेजी बनी हुई है। बुधवार सुबह 6:28 बजे WTI क्रूड का रेट 0.43% की तेजी के बाद 84.69 प्रति बैरल पर आ गया। ब्रेंट क्रूड की कीमत भी 0.57% के उछाल के बाद 91.50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ तुरंत कोई भी बातचीत करने से इनकार कर दिया है वहीं दूसरी तरफ यमन के हाउथी आंदोलन के अंतर्गत लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला प्रमुख समुद्री मार्ग बाब अल-मन्देब जलडमरूमध्य की नाकाबंदी की चेतावनियां दी जा रही है। इन सब परिस्थितियों का असर भारत के आयात से लेकर पेट्रोल-डीजल की कीमत और निवेशकों पर भी देखने को मिल सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे उछाल का कारण
  • तेल की कीमतों में आई इस तेजी के पीछे का सबसे अहम कारण अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव है।
  • मंगलवार को दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रहने की बात कही जा रही थी, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नकार दिया।
  • बाब अल-मंडेब में भी नाकाबंदी का ऐलान किया जा रहा है और जहाजों को वापस लौटाया जा रहा है।
  • ईरान के निर्देश पर शिपिंग कंपनियों को सऊदी बंदरगाहों से दूर रहने के आदेश दिए जा रहे हैं।
  • बाब अल-मंडेब इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एशिया और अफ्रीका के बीच गुजरने वाले जहाज को यहां से होकर जाना ही पड़ता है।
  • इसके बंद होने से ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर और बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
भारत पर क्या प्रभावबाब अल-मंडेब जलमार्ग का बंद होना भारत के लिए किसी बड़े झटके के जैसे होगा। भारत यूरोप के साथ व्यापारिक साझेदार है और भारत यूरोप के साथ व्यापार लगभग 80% इस मार्ग के जरिए पूरा करता है। ऐसे में नाकाबंदी का मतलब है भारत के लिए बीमा, परिवहन जैसी कई लागतों का बढ़ जाना। पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के कारण कच्चे तेल और गैस की सप्लाई के लिए परेशान है।

भारत में पेट्रोल डीजल की कीमत बढ़ेगी?इस साल में दूसरी बार शुरू हुए मिडिल ईस्ट तनाव के कारण अभी तक तेल मार्केटिंग कंपनियों पेट्रोल और डीजल के दाम में वृद्धि नहीं की है। लेकिन पहली बार जब युद्ध शुरू हुआ था तब पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई गई थी। यदि लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती है या लगातार तेजी के साथ बढ़ती है तो इसका असर भारत में भी ईंधन की कीमतों पर देखने को मिल सकता है।

( कीमत : रुपये प्रति लीटर )




भारतीय बाजारों पर असरपश्चिम एशिया में बढ़ रहे तनाव और जलमार्गों के नाकाबंदी का असर भारतीय निवेशकों और आयातकों पर देखने को मिल सकता है। निर्यातकों को रसद लागत बढ़ानी पड़ेगी। देश के तेल मार्केटिंग कंपनियों को महंगे दाम पर कच्चा तेल खरीदना पड़ रहा है। इन सब परिस्थितियों का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल रहा है।

ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक Goldman Sachs भी चेतावनी जारी कर चुके हैं कि यदि पश्चिम एशिया का तनाव जल्दी समाप्त नहीं होता है तो कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच सकती है।
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