लड़की को थप्पड़ मारने का आरोप, दिल्ली पुलिस के ADCP संदीप लांबा पर दर्ज होगा मुकदमा? हाई कोर्ट में बुरी तरह घिरे
TV9 Bharatvarsh July 22, 2026 10:43 PM

दिल्ली हाई कोर्ट में मंगलवार को “संसद चलो” मार्च के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने दावा किया कि वायरल वीडियो में दिल्ली पुलिस के एडीसीपी संदीप लांबा एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते दिखाई दे रहे हैं. इस मामले पर कोर्ट ने कोई टिप्पणी किए बिना दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश दिया है. ऐसे में सोशल मीडिया पर ये सवाल उठाए जा रहे हैं कि ADCP संदीप लांबा पर मुकदमा दर्ज होना चाहिए? चलिए समझते हैं पूरा मामला

महिला को थप्पड़ मारने का आरोप, कोर्ट में दिखाए गए वीडियो

दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि उनकी टीम ने घटना से जुड़े करीब 130 वीडियो की जांच की है. उन्होंने अदालत में दावा किया कि कई लोग बिना पुलिस वर्दी और बिना पहचान बैज के प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करते दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने एक वीडियो का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस के उत्तर पूर्व जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त यानी एडीसीपी संदीप लांबा एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते नजर आ रहे हैं, जबकि वह कुछ नहीं कर रही थी. उन्होंने अदालत से कहा कि वर्दी पहनने वाले ऐसे अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए.

Sandeep Lamba, Additional DCP of Delhi Police, slapped a girl in the face on camera.

How can a male police officer even touch a female protestor, let alone slapping her?

I hope someone sue this arrogant prick. #CJPProtests pic.twitter.com/ttkgBicfZR

— Jaswinder kaur (@TheReal_Jassi) July 21, 2026

दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने फिलहाल आरोपों की सत्यता पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. हालांकि अदालत ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाओं में जिन घटनाओं का जिक्र किया गया है, उनसे जुड़े सभी जरूरी रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और वीडियोग्राफी को दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार की एसओपी के अनुसार सुरक्षित रखा जाए. मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी.

याचिकाकर्ताओं ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन, गोपाल शंकरनारायण और विकास सिंह ने अदालत में कहा कि जंतर मंतर से शुरू हुआ प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और लोग संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहे थे. उनका आरोप था कि पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया. अदालत में यह भी दावा किया गया कि लाठियों, आंसू गैस, पैलेट और इलेक्ट्रिक बैटन का इस्तेमाल किया गया, जिससे 90 से ज्यादा प्रदर्शनकारी घायल हुए. याचिकाकर्ताओं ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग भी की.

दिल्ली पुलिस ने आरोपों को बताया भ्रामक

दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने याचिकाओं का विरोध किया. उन्होंने कहा कि पूरा मामला सोशल मीडिया वीडियो पर आधारित है, जिनकी प्रमाणिकता अभी साबित नहीं हुई है. उनके मुताबिक प्रदर्शन हिंसक हो गया था और कई वीडियो में पुलिसकर्मियों के घायल होने तथा सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ भी दिखाई दे रही है. उन्होंने अदालत से कहा कि याचिकाकर्ताओं ने कई तथ्यों को छिपाया है और अगर किसी व्यक्ति के साथ अपराध हुआ है तो उसके लिए कानून में अलग उपाय उपलब्ध हैं. राजू ने यह भी कहा कि अगर कोई संज्ञेय अपराध बनता है और पुलिस को इसकी जानकारी मिलती है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी.

कोर्ट ने पब्लिक लॉ के तहत उपाय का भी किया जिक्र

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के अनीता ठाकुर बनाम जम्मू कश्मीर फैसले का जिक्र किया. अदालत ने कहा कि पुलिस कार्रवाई के दौरान मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आरोपों पर पब्लिक लॉ के तहत भी राहत मांगी जा सकती है. कोर्ट ने साफ किया कि वह फिलहाल किसी भी पक्ष के आरोपों की सत्यता पर कोई राय नहीं दे रहा है. फिलहाल सिर्फ रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और संबंधित पक्षों से जवाब मांगने का आदेश दिया गया है, ताकि सुनवाई के दौरान सभी जरूरी साक्ष्य उपलब्ध रहें.

कौन हैं एडीसीपी संदीप लांबा

संदीप लांबा दिल्ली पुलिस में उत्तर पूर्व जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त के पद पर तैनात हैं. वह दानिप्स कैडर के अधिकारी हैं. “संसद चलो” मार्च के दौरान वायरल हुए वीडियो के बाद उनका नाम विवादों में आया. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारा, जबकि लांबा ने इन आरोपों पर सीधे प्रतिक्रिया देने के बजाय मीडिया से कहा कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ बैरिकेड तोड़ने की कोशिश कर रही थी और पत्थरबाजी हुई. उनके मुताबिक एक पत्थर उनके घुटने पर लगा, जिससे उन्हें चोट आई और धक्का मुक्की में उनकी वर्दी भी फट गई.

Delhi: During yesterday’s protest by CJP, Additional DCP of North-East Delhi Sandeep Lamba suffered an injury to his knee, and his police uniform was also torn. He says, “…A stone hit my knee. My dress was torn. I suffered a blunt injury and there is a crack…” pic.twitter.com/0ZDuykN2aE

— IANS (@ians_india) July 21, 2026

प्रदर्शन के बाद दर्ज हुईं कई एफआईआर

दिल्ली पुलिस के मुताबिक “संसद चलो” मार्च के दौरान हिंसा, पथराव और तोड़फोड़ के आरोप में कम से कम नौ एफआईआर दर्ज की गई हैं. ये मामले पार्लियामेंट स्ट्रीट, बाराखंबा रोड और कनॉट प्लेस समेत कई थानों में दर्ज हुए हैं. इनमें सरकारी कर्मचारी पर हमला, सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, दंगा और आरएएफ के एक जवान की हत्या के प्रयास जैसी धाराएं लगाई गई हैं. अब इस पूरे मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी, जहां पुलिस और केंद्र सरकार अपना जवाब दाखिल करेंगे.

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