मुस्लिम परिवार के केस की सुनवाई में जज ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर क्यों की टिप्पणी?
TV9 Bharatvarsh July 22, 2026 10:45 PM

उत्तर प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर एक बार फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी चर्चा में है. लेकिन इस बार वजह सिर्फ ‘बुलडोजर न्याय’ पर अदालत का बंटा हुआ फैसला नहीं है, बल्कि सुनवाई के दौरान एक जज की वह टिप्पणी भी है, जिसमें उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले का जिक्र करते हुए देश में बढ़ते भ्रष्टाचार पर गंभीर चिंता जताई. न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने कहा कि अगर राम मंदिर में चढ़ावा चोरी जैसी घटना भी लोगों को शर्मिंदा नहीं करती, तो फिर समाज को किसी भी बात से शर्मिंदा करना मुश्किल है.

उन्होंने यहां तक सुझाव दिया कि गंभीर भ्रष्टाचार के मामलों में भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मृत्युदंड जैसे कड़े प्रावधानों पर भी विचार किया जाना चाहिए. यह टिप्पणी ऐसे समय आई, जब अदालत एक मुस्लिम परिवार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे अपने मकान पर बुलडोजर चलने की आशंका है.

तीसरे जज के पास पहुंचा मामला

दरअसल, मामला बुलडोजर कार्रवाई की वैधता से जुड़ा था. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ के दोनों जज इस सवाल पर एकमत नहीं हो सके कि किसी आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद उसके मकान को गिराने पर सामान्य रोक लगाई जा सकती है या नहीं. न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद दो साल तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, जबकि न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने माना कि अदालत ऐसा सामान्य निर्देश नहीं दे सकती.

दोनों जजों के अलग-अलग मत की वजह से मामला अब तीसरे जज के पास भेजा जाएगा. हालांकि, इस पूरे फैसले में न्यायमूर्ति श्रीधरन की भ्रष्टाचार और राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर की गई टिप्पणी सबसे ज्यादा चर्चा में है.

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ बुलडोजर कार्रवाई पर एकमत नहीं हुई.
  • न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का जिक्र करते हुए भ्रष्टाचार पर सख्त टिप्पणी की.
  • उन्होंने भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में मृत्युदंड जैसे कड़े कानून पर विचार करने का सुझाव दिया.
  • एक जज ने एफआईआर के बाद दो साल तक बुलडोजर कार्रवाई रोकने की बात कही, दूसरे जज ने इससे असहमति जताई.
  • मामला अब अंतिम फैसला देने के लिए तीसरे जज के पास जाएगा.

तीसरे जज के पास बुलडोजर केस (Getty Image)

क्या है पूरा मामला?

यह मामला हमीरपुर जिले के सुमेरपुर थाना क्षेत्र का है. फैमुद्दीन और उनके परिवार के दो अन्य सदस्यों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की. उनका कहना है कि उनके एक रिश्तेदार के खिलाफ पॉक्सो और धर्मांतरण कानून के तहत एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस की मिलीभगत से भीड़ ने उनके मकान को निशाना बनाया. बाद में फैमुद्दीन को भी आरोपी बना दिया गया. परिवार का कहना है कि अब प्रशासन उनके मकान को भी गिरा सकता है और उनकी संपत्ति को चिन्हित किया गया है.

दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि याचिका समय से पहले दाखिल की गई है. सरकार के मुताबिक, अभी कोई ध्वस्तीकरण नहीं हुआ है और याचिकाकर्ताओं को नोटिस का जवाब देना चाहिए.

बुलडोजर कार्रवाई पर क्यों बंट गई अदालत?

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने कहा कि अदालत के सामने ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद नगर निगम या विकास प्राधिकरण की ओर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी गई. उनके अनुसार, अगर यह कार्रवाई किसी आरोपी को दंडित करने या बदले की भावना से की जाती है, तो यह स्वीकार नहीं की जा सकती.

इन ध्वस्तीकरण के संदर्भ में उन्होंने कहा कि किसी अपराध के तुरंत बाद मकान गिराना, मुख्य रूप से उस समाज की खून की प्यास को शांत करना है जो बुलडोजर न्याय का आदी हो चुका है. इसी वजह से उन्होंने सुझाव दिया कि एफआईआर दर्ज होने की तारीख से दो साल तक आरोपी के मकान पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए.

जज ने राम मंदिर का जिक्र क्यों किया? (Getty Image)

वहीं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने अलग राय रखते हुए कहा कि अदालत यह मानकर चलती है कि सरकार कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करेगी. अगर किसी व्यक्ति के साथ अन्याय होता है तो उसके पास अदालत आने का अधिकार हमेशा मौजूद है. इसलिए अदालत किसी तय अवधि के लिए सरकार को कार्रवाई से नहीं रोक सकती.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर जज ने क्या कहा?

अपने 51 पन्नों के फैसले में न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने भ्रष्टाचार पर लंबी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मामला भारतीय ईमानदारी के सबसे निचले स्तर को दिखाता है. उन्होंने टिप्पणी की कि अगर समाज ऐसी घटना से भी विचलित नहीं होता, तो वह किसी भी बात पर शर्म महसूस नहीं करेगा. उनके अनुसार, भारत में भ्रष्टाचार को अब सामान्य मान लिया गया है और लोग तब तक उसे गलत नहीं मानते, जब तक पकड़े नहीं जाते.

भ्रष्टाचार पर क्या सुझाव दिया?

न्यायमूर्ति श्रीधरन ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल 2025 की रिपोर्ट का भी उल्लेख करते हुए कहा कि भारत भ्रष्टाचार सूचकांक में 182 देशों में 91वें स्थान पर है, लेकिन यह भी लोगों को शर्मिंदा नहीं करता. उन्होंने कहा कि सरकार को भ्रष्टाचार निरोधक कानून, 1988 में संशोधन कर गंभीर भ्रष्टाचार के मामलों में मृत्युदंड जैसे कठोर प्रावधान पर विचार करना चाहिए. उनके मुताबिक व्यवस्थित भ्रष्टाचार देश की संस्थाओं को कमजोर कर रहा है और अब इससे निपटने के लिए कड़े कदम जरूरी हैं.

अवैध निर्माण पर भी जताई चिंता

न्यायमूर्ति श्रीधरन ने कहा कि कोई भी अवैध मकान एक रात में नहीं बन जाता. उन्होंने अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई बार राजनीतिक या नौकरशाही संरक्षण के कारण अवैध निर्माण होते रहते हैं. बाद में वही अधिकारी बुलडोजर चलाकर कार्रवाई करते हैं, जबकि निर्माण कराने वाले भ्रष्ट तंत्र की जवाबदेही तय नहीं होती. उन्होंने कहा कि कई मामलों में रिश्वत लेकर अवैध निर्माण की अनुमति दी जाती है और अंत में उसका नुकसान मकान खरीदने वाले आम लोगों को उठाना पड़ता है.

राम मंदिर चोरी विवाद क्या है?

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला जून 2026 में सामने आया, जब मंदिर में दान की गिनती का काम करने वाले कर्मचारियों समेत आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. जांच एजेंसियों का आरोप है कि चढ़ावे में आए नकदी और कीमती सामान का गबन किया गया, जिसके बाद सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जांच की निगरानी शुरू की और नई एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए. इस विवाद के बाद मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और दान व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल उठे.

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