राजनीतिक तनाव: जेपी नड्डा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद उभरे विवाद
Udaipur Kiran Hindi July 23, 2026 08:42 AM

New Delhi, 23 जुलाई: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस और Indian जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रियाएँ दी हैं. विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की आवाज़ों को दबाने और जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया है, जबकि बीजेपी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस और विपक्ष छात्रों के मुद्दों का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं.

आरजेडी के सांसद सुधाकर सिंह ने सवाल उठाया कि क्या सरकार देश में आंदोलनों और राजनीतिक संवाद की अनुमति देगी. उन्होंने जंतर-मंतर पर छात्रों के एकत्र होने पर सरकार द्वारा बल प्रयोग करने की चिंता व्यक्त की, यह बताते हुए कि उनकी शिकायतों के लिए कोई माफी या समाधान नहीं दिया गया है. सिंह ने पेपर लीक मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई न करने के लिए सरकार की आलोचना की, जबकि कई घटनाएँ और सीबीआई जांच जारी हैं.

सिंह ने जोर देकर कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्र किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े नहीं हैं, बल्कि वे सामान्य परिवारों के बच्चे हैं, और सरकार से समाधान खोजने के लिए संवाद करने का आग्रह किया. उन्होंने संसद में बोलने के अवसर की कमी और नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग की आलोचना की, इसे आपातकालीन स्थिति के समान बताया. उन्होंने NEET मामले में मुख्य आरोपी के खिलाफ आरोप लगाने में देरी का भी उल्लेख किया और पेपर लीक सिंडिकेट्स के संबंध में केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए.

कांग्रेस नेता सुखदेव भगत ने कहा कि लाखों छात्र पेपर लीक से प्रभावित हुए हैं, जिससे उनके भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है और बार-बार Examination एँ हो रही हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों को उठाना राजनीतिक नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य का मामला है. राहुल गांधी ने पिछले दो वर्षों में इन चिंताओं को लगातार उठाया है, फिर भी सरकार असंवेदनशील बनी हुई है. भगत ने छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग और संसद में विपक्ष की आवाज़ों को दबाने की निंदा की.

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने सवाल किया कि स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से संबंधित मुद्दों पर क्यों प्रतिक्रिया दे रहे थे. उन्होंने सरकार के इस दृष्टिकोण की आलोचना की कि विभिन्न मंत्रियों को जवाब देने दिया जाए, बजाय इसके कि प्रधानमंत्री को जवाबदेह ठहराया जाए. खेड़ा ने छात्रों के खिलाफ आंसू गैस और पुलिस की बर्बरता के उपयोग पर भी चिंता जताई.

उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की आलोचना करते हुए सुझाव दिया कि इसे एक स्वतंत्र वैधानिक निकाय के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए, न कि एक समाज के रूप में संचालित किया जाना चाहिए.

बीजेपी नेता आरपी सिंह ने कहा कि पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि केंद्रीय सरकार ने 2024 में पेपर लीक को रोकने के लिए कड़े कानून पेश किए थे, जो संसद द्वारा पारित हुए थे. सिंह ने दावा किया कि उस समय राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने इस कानून पर कोई सुझाव नहीं दिया, फिर भी वे अब इस मुद्दे को राजनीतिक बना रहे हैं.

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