झारखंड में शुरू होंगे AME और एयर होस्टेस कोर्स, जानें फीस, सीटें और आवेदन की पूरी डिटेल
TV9 Bharatvarsh July 23, 2026 01:43 PM

झारखंड सरकार राज्य के युवाओं के लिए एविएशन सेक्टर में करियर के नए अवसर खोलने जा रही है. राज्य में पहली बार सरकारी स्तर पर एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (AME) और एयर होस्टेस ट्रेनिंग कोर्स शुरू किए जाएंगे. इसके साथ ही झारखंड पूर्वी भारत का पहला राज्य बन जाएगा, जहां इस तरह की सरकारी पहल की जा रही है. इन कोर्सों की शुरुआत 15 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन करेंगे. इससे झारखंड के साथ-साथ बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के युवाओं को भी अपने राज्य के नजदीक ही विमानन क्षेत्र की पढ़ाई का अवसर मिलेगा.

झारखंड सरकार ने एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (AME) और एयर होस्टेस ट्रेनिंग शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है. इन कोर्सों का संचालन धनबाद स्थित झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत किया जाएगा. एएमई कोर्स के लिए दिल्ली की एक कंपनी के साथ समझौता किया गया है, जबकि एयर होस्टेस ट्रेनिंग के लिए भोपाल की संस्था के साथ करार हुआ है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 15 नवंबर को इन कोर्सों का शुभारंभ करेंगे. हालांकि, कोर्सों की शुरुआत नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) से मंजूरी मिलने के बाद होगी.

कोर्स की सीटें

एएमई कोर्स में कुल 60 सीटें होंगी. यह तीन वर्ष का कोर्स होगा, जिसकी कुल फीस 6 लाख रुपये तय की गई है. स्टूडेंट्स को फीस तीन साल में 2-2 लाख रुपये की वार्षिक किस्तों में जमा करने की सुविधा मिलेगी.

फीस और आवेदन की जानकारी

वहीं एयर होस्टेस ट्रेनिंग के तहत 6 माह और 12 माह के दो अलग-अलग कोर्स चलाए जाएंगे. दोनों कोर्सों में 60-60 सीटें उपलब्ध रहेंगी. छह माह के कोर्स की फीस 1,00,500 रुपये और 12 माह के डिप्लोमा की फीस 1,55,500 रुपये रखी गई है. इस फीस में ड्रेस, ग्रूमिंग किट और स्विमिंग ट्रेनिंग भी शामिल रहेगी.

एयर होस्टेस कोर्स के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 30 जुलाई निर्धारित की गई है और इच्छुक अभ्यर्थी झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट की वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं.

युवाओं को मिलेगा बड़ा फायदा

सरकार का कहना है कि इन कोर्सों से झारखंड के साथ-साथ बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के युवाओं को भी लाभ मिलेगा. अब उन्हें विमानन क्षेत्र की पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी.

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