बेंगलुरु की एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) मीनल गोयल की एक पोस्ट इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. उन्होंने एक बहुत ही अहम सवाल उठाया है कि क्या सिर्फ दो दिन के दिखावे और रिश्तेदारों को खुश करने के लिए शादी में 20 लाख रुपए उड़ाना सही है?
20 लाख रुपए आखिर जाते कहां हैं?KPMG और Deloitte जैसी बड़ी कंपनियों में काम कर चुकीं मीनल ने 20 लाख की शादी का पूरा गणित समझाया है. उनके मुताबिक, सबसे बड़ा हिस्सा 6 लाख खाने-पीने पर खर्च होता है, जबकि हॉल की बुकिंग पर 5 लाख का खर्च आता है. इसके अलावा सजावट पर 3 लाख, फोटोग्राफी पर 2 लाख और मनोरंजन पर 2 लाख खर्च हो जाते हैं. आखिर में 2 लाख रुपए अन्य खर्चों के लिए रखे जाते हैं.
जश्न मनाएं, लेकिन समझदारी सेमीनल का कहना है कि महज 48 घंटे के अंदर यह पूरा पैसा हवा हो जाता है, लेकिन यह आर्थिक बोझ परिवार को सालों तक झेलना पड़ता है. मीनल ने स्पष्ट किया कि वह शादी का जश्न मनाने के खिलाफ बिल्कुल नहीं हैं. उनका मानना है कि शादी खुशी का मौका होनी चाहिए न कि कर्ज या तनाव की वजह.
CA ने दी ये सलाहउन्होंने आगे कहा कि अगर ये 20 लाख रुपए किसी घर की डाउन पेमेंट, इमरजेंसी फंड या इनवेस्टमेंट में लगाए जाएं, तो नए कपल की जिंदगी आर्थिक रूप से बहुत मजबूत और सुकून भरी हो सकती है.
इंटरनेट पर छिड़ी बहसमीनल की इस सलाह पर नेटिजन्स दो हिस्सों में बंट गए हैं. एक पक्ष का मानना है कि वह बिल्कुल सही कह रही हैं. मिडिल क्लास परिवारों पर शादी के नाम पर बहुत दबाव होता है और इसे खत्म होना चाहिए. दूसरे पक्ष का कहना है कि शादी जिंदगी में बार-बार नहीं होती, इसलिए इस खास दिन पर दिल खोलकर खर्च करने में कोई बुराई नहीं है.
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