सोशल मीडिया खोलो तो हर दूसरी पोस्ट में सैलरी का रोना लगा होता है. किसी को पैकेज कम लग रहा है, किसी का बॉस increment नहीं दे रहा. लेकिन इस बार कहानी बिल्कुल उल्टी है. Reddit पर एक पोस्ट ताबड़तोड़ वायरल हो रही है, जहां एक लड़का अपनी ज्यादा सैलरी को लेकर परेशान है. हां, आपने सही पढ़ा. ज्यादा सैलरी आने पर भी उसे गिल्ट हो रहा है. ये मामला है r/IndianWorkplace का, जहां लोग अक्सर ऑफिस की पॉलिटिक्स, बॉस की हरकतें और जॉब से जुड़े किस्से शेयर करते हैं. यहां एक नए-नवेले मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव ने अपना दिल खोलकर रख दिया.
इस लड़के ने बताया कि 2 साल तक इंटर्नशिप में धक्के खाने के बाद आखिरकार उसे एक स्टार्टअप में पहली फुल-टाइम जॉब मिली है. रोल है मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव का. और सैलरी? 43,000 रुपये इन-हैंड, हर महीने बैंक में. जाहिर है, पहली नौकरी के हिसाब से ये एक बहुत ही अच्छी शुरुआत है, लेकिन उसकी खुशी ज्यादा दिन टिकी नहीं. ऑफिस के पहले ही कुछ दिनों में उसका सामना ऐसी हकीकत से हुआ जिसने उसकी नींद उड़ा दी.
क्यों उड़े बंदे के होश?उसी दिन उसके साथ एक और शख्स ने भी जॉइन किया था, सेल्स डिपार्टमेंट में. बातचीत में पता चला कि उस आदमी के पास 12 साल का तगड़ा एक्सपीरियंस है. वो रिलायंस, विजय सेल्स और क्रोमा जैसे बड़े-बड़े रिटेल ब्रांड्स में काम कर चुका है. मतलब, मार्केट का खिलाड़ी है. उसने बस अपना सेक्टर बदला है और इस स्टार्टअप में आया है. 12 साल के एक्सपीरियंस के बाद भी उस सेल्स वाले बंदे की इन-हैंड सैलरी सिर्फ 31,000 रुपये है, वो भी बिना किसी इंसेंटिव के और यहीं से इस नए लड़के का गिल्ट वाला चैप्टर शुरू होता है.
वो सोच में पड़ गया – यार, मैं तो फ्रेशर हूं, मेरे पास तो सिर्फ इंटर्नशिप का एक्सपीरियंस है और मुझे 43 हजार मिल रहे हैं. वहीं सामने वाला बंदा 12 साल से इस फील्ड में पिस रहा है, उसके बाद भी उसे मुझसे 12 हजार कम मिल रहा है. क्या ये सही है? उसने आगे ये भी बताया कि ऐसे ही बातों-बातों में उसे पता चला कि ऑफिस में जो ऑफिस बॉय है, उसकी सैलरी 15,000 रुपये है. अब वो पूरी तरह कन्फ्यूज हो गया.
क्या कहा लोगों ने?उसे लगने लगा कि कहीं कंपनी पुराने और अनुभवी लोगों का फायदा तो नहीं उठा रही? क्या उन्हें कम पैसे देकर ज्यादा काम करवाया जा रहा है? उसने पोस्ट में साफ लिखा कि वो नया है, उसे इस इंडस्ट्री की अंदरूनी बातें ज्यादा नहीं पता, लेकिन अपने से कहीं ज्यादा सीनियर आदमी से ज्यादा पैसे लेना उसे अंदर ही अंदर खाए जा रहा है. जैसे ही उसने ये पोस्ट डाली, कमेंट्स की बाढ़ आ गई. और ज्यादातर लोगों ने उसे एक ही बात समझाई – भाई, गिल्टी फील करना बंद करो, ये कॉर्पोरेट है.
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एक यूजर ने बहुत सीधी बात लिखी कि देख भाई, हर रोल की वैल्यू अलग होती है. सेल्स और मार्केटिंग दो अलग चीजें हैं. हो सकता है कंपनी को तुम्हारे स्किलसेट की ज्यादा जरूरत हो. हो सकता है उनसे उम्मीद ही ज्यादा हो कि तुम कंपनी को ग्रो करवाओगे. दूसरे ने कहा कि स्टार्टअप में ऐसा बहुत होता है. तुम्हें 43 हजार इसलिए नहीं मिल रहे क्योंकि तुम फ्रेशर हो, बल्कि इसलिए मिल रहे हैं क्योंकि तुमसे बिना टाइम देखे काम करवाया जाएगा. मार्केटिंग में कोई 9-to-5 नहीं होता. रात को 11 बजे भी पोस्ट डालनी पड़ सकती है, संडे को भी कैंपेन देखना पड़ सकता है. सेल्स का काम फिक्स रहता है, लेकिन मार्केटिंग का नहीं. वैसे देखा जाए तो ये कहानी हमें बताती है कि कॉर्पोरेट की दुनिया में सैलरी सिर्फ एक्सपीरियंस के साल गिनकर नहीं तय होती. रोल, स्किल, डिमांड और कंपनी की जरूरत, सब मिलकर तुम्हारी कीमत तय करते हैं.
यहां देखिए पोस्टfeeling guilty with my inhand salary
by
u/notdavinciforsure in
IndianWorkplace
Disclaimer: ये कहानी रेडिट पर वायरल हुए पोस्ट पर आधारित है. इसके साथ ही हमने इसमें लोगों के कमेंट्स के आधार पर ये कॉपी तैयार की है. TV9 भारतवर्ष पोस्ट में उल्लिखित व्यक्तियों द्वारा किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है.