MP Private University: मध्य प्रदेश में प्राइवेट यूनिवर्सिटी खोलने की राह पहले के मुकाबले आसान हो गई है. राज्य सरकार ने प्राइवेट यूनिवर्सिटी की स्थापना से जुड़े नियमों में बदलाव करते हुए विधानसभा से संशोधन विधेयक पारित करा लिया है. सरकार का कहना है कि नए बदलाव का मकसद प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निवेश बढ़ाना है और नए यूनिवर्सिटी की संख्या में इजाफा करना है. वहीं सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि नए नियम आसन किया गए हैं, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा.
अब एमपी में कम जमीन में भी शुरू हो सकेगी यूनिवर्सिटी
संशोधित कानून के बाद प्राइवेट यूनिवर्सिटी स्थापित करने के लिए पहले जितनी जमीन की जरूरत होती थी, अब उतनी नहीं रहेगी. सरकार ने भूमि संबंधी शर्तों को आसान बनाया है, ताकि ज्यादा संस्थाएं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निवेश कर सके. हालांकि विश्वविद्यालय को जरूरी शैक्षणिक संसाधन और नियामकीय मानकों का पालन करना होगा. सरकार के अनुसार प्राइवेट यूनिवर्सिटी शुरू करने के लिए कम से कम 10 हेक्टेयर भूमि पर्याप्त होगी. पहले इसके लिए 20 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता होती थी. इसके अलावा यूनिवर्सिटी संचालक को 2500 वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्र और 5 करोड़ रुपये की राशि जमा करनी होगी, ताकि किसी भी डिफॉल्ट की स्थिति में छात्रों के हित की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. हालांकि सरकार ने यह भी कहा है कि यूजीसी और संबंधित पेशेवर पाठ्यक्रमों के लिए आवश्यक संसाधनों में किसी तरह की छूट नहीं दी गई है. मेडिकल या दूसरी स्पेशल यूनिवर्सिटी के लिए निर्धारित मानकों का पालन करना भी अनिवार्य होगा.
प्राइवेट यूनिवर्सिटी को लेकर सरकार का तर्क
राज्य सरकार का कहना है कि ज्यादा भूमि, भारी निवेश और दूसरी कठोर शर्तों की वजह से कई संस्थाएं प्राइवेट यूनिवर्सिटी स्थापित नहीं कर पा रही थी. लेकिन अब नियमों को सरल बनाने से शिक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और प्रदेश में नए यूनिवर्सिटी खुलेंगे. उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विधानसभा में कहा कि संशोधन से यूनिवर्सिटी की गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि कानून में पहले से ही ऐसे प्रावधान मौजूद हैं, जिनके तहत जरूरत पड़ने पर नियम बनाए जा सकते हैं और छात्रों के हितों की रक्षा की जाएगी.
खाली पदों पर भी होगी भर्ती
एमपी विधानसभा मानसून सत्र में चर्चा के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश के विश्वविद्यालय में खाली पड़े शिक्षकों और दूसरे पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है. जहां नियमित नियुक्तियों में समय लग रहा है, वहां प्रतिनियुक्ति के आधार पर प्रोफेसर की नियुक्ति की जा रही है, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो. उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के सभी कॉलेजों में 31 जुलाई तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, साथ ही यूनिवर्सिटी को निर्देश दिए गए हैं कि वह शैक्षणिक कैलेंडर का सख्ती से पालन करें, ताकि सत्र और परीक्षा समय पर आयोजित हो सके.
शिक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की भी तैयारी
राज्य सरकार का मानना है कि संशोधित नियमों के लागू होने के बाद प्रदेश में नए प्राइवेट यूनिवर्सिटी की संख्या बढ़ेगी. इससे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कंपटीशन बढ़ेगा. ऐसे में छात्रों को ज्यादा संस्थानों में पढ़ाई का अवसर मिलेगा और प्रदेश का उच्च शिक्षा ढांचा भी मजबूत होगा.