अगली बार जब आप स्मार्ट टीवी, स्मार्टफोन या कोई कनेक्टेड किचन अप्लायंस खरीदें, तो हैरान न हों अगर उसकी कीमत आपकी उम्मीद से ज्यादा हो. इसका कारण टैरिफ या शिपिंग कॉस्ट नहीं, बल्कि चिपफ्लेशन हो सकता है, जो ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रेस से उभर रहा एक नया ट्रेंड है. जैसे-जैसे कंपनियां एडवांस्ड मेमोरी और AI चिप्स पाने के लिए हाथ-पैर मार रही हैं, इन जरूरी पार्ट्स की कीमत तेजी से बढ़ रही है और कस्टमर्स पर इसका असर पड़ने की संभावना है.
क्या है Chipflation?फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक, सेमीकंडक्टर, खासतौर से एडवांस्ड लॉजिक और मेमोरी चिप्स की कीमतों में तेज से बढ़ोतरी हो रही है जिसका इस्तेमाल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए किया जाता है. इसे चिपफ्लेशन कहा जाता है, जबकि कई लोग AI की मांग को महंगे डेटा सेंटर GPU से जोड़ते हैं लेकिन इसका असर सर्वर से कहीं आगे तक है.
AI बूम से कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?न्यूयॉर्क लाइफ इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट की ग्लोबल मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट जूलिया हरमन, जिन्होंने बिजनेस इनसाइडर से बात की, उनके अनुसार, AI बूम सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में महंगाई का नया दबाव बना रहा है. वह कहती हैं कि बड़े पैमाने पर AI इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने वाली टेक्नोलॉजी की बड़ी कंपनियों को कई मोर्चों पर बढ़ती लागत का सामना करना पड़ रहा है. AI चिप्स ज्यादा महंगी होती जा रही हैं, जबकि AI डेटा सेंटर चलाने के लिए जरूरी बिजली और यूटिलिटी की लागत भी बढ़ रही है साथ ही, इन इन्वेस्टमेंट पर अच्छा रिटर्न मिलने में अभी भी कई साल लग सकते हैं.
कंज्यूमर्स पर ऐसे पड़ेगा असरग्राहकों के लिए चिपफ्लेशन का असर उन जगहों पर दिख सकता है, जिनकी उन्हें कम से कम उम्मीद होती है. हालांकि AI वाले लैपटॉप और टैबलेट जैसे प्रीमियम डिवाइस और महंगे हो सकते हैं, लेकिन इसका असर यहीं रुकने वाला नहीं है. जैसे-जैसे डेली इस्तेमाल के प्रोडक्ट कनेक्टेड होते जाएंगे और उनमें AI फीचर्स शामिल होंगे, मैन्युफैक्चरर्स को ज्यादा एडवांस्ड मेमोरी और प्रोसेसिंग चिप्स की जरूरत होगी, जिससे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की एक बड़ी रेंज में प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ जाएगी. दुनिया का AI फ्यूचर बनाने की दौड़ में लोग डेली इस्तेमाल होने वाले गैजेट्स को चुपचाप थोड़ा और महंगा बना सकते हैं.
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