ईरान युद्ध की वजह से महंगाई की 'EMI' दे रही जनता, कैसे-कैसे कट रही आपकी जेब? ऐसे हो रहा नुकसान
अरिजीता सेन July 24, 2026 08:42 PM

Iran-US War Impact: ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग की वजह से क्रूड ऑयल की कीमतें रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई है. मार्च-अप्रैल में पश्चिम एशिया में दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष और होर्मुज (Strait of Hormuz) से एनर्जी सप्लाई रूकने के कारण कच्चा तेल 120 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया था. जून में दोनों के बीच हुए अंतरिम युद्धविराम समझौते के बार कीमतें गिरकर 68-77 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गई, लेकिन अब जुलाई में संकट फिर से गहराने लगा है.  

कच्चे तेल पर संकट

एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष बढ़ता जा रहा है और दूसरी तरफ लाल सागर में हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने के बाद ब्रेंट क्रूड एक बार फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के लेवल के पार (100.69 डॉलर) जा चुका है. दिग्गज इंवेस्टमेंट बैंक Goldman Sachs ने चेतावनी दी है कि अगर आने वाले समय में भी यही हाल रहा, तो कीमतें एक बार फिर से 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती है. 

रुपये पर असर

क्रूड ऑयल की कीमतों में आई इस नई तेजी और पश्चिम एशिया में तनाव के चलते भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 95.11 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर टूट गया है. चूंकि भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है. ऐसे में तेल की कीमतों में 100 डॉलर का उछाल देश के आयात बिल को बढ़ाएगा, जिसका असर रिटेल महंगाई पर पड़ता है.

सोने पर बढ़ी दिलचस्पी

आमतौर पर वैश्विक संकट और युद्ध की स्थिति में लोग शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने पर लगाते हैं और इसलिए इसे 'सेफ हेवेन' कहा जाता है. जब भी तनाव का माहौल बढ़ता है, तो सोने की मांग भी बढ़ जाती है. 22 जुलाई, 2026 को जब लाल सागर में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तेल टैंकराें को निशाना बनाया और अमेरिका ने इस पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी, तो निवेशकों में डर फैल गया. इसके चलते वैश्विक बाजार में सोना उछलकर 4100 डॉलर प्रति औंस के पार चला गया.

EMI कम होने की उम्मीदें घटीं

कच्चा तेल महंगा होगा, तो पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ेगी. इसका असर रिटेल स्तर पर महंगाई पर भी पड़ेगा. फ्यूल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट पर असर पड़ेगा. इससे फल, दूध, सब्जियों की कीमतें बढ़ेंगी. देश में महंगाईका स्तर बढ़ने से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन पर ब्याज दरें कम होने की उम्मीदें भी कम हो जाती है. 

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