ट्रंप ने नहीं की कंगले पाकिस्तान की मदद, ऊपर से ठोक दिया 10% का नया टैरिफ; भारत पर भी साधा निशाना
अरिजीता सेन July 24, 2026 08:42 PM

Donald Trump 10% Tariff: पाकिस्तान ने हाल ही में अमेरिका से 96000 करोड़ रुपये (10 बिलियन डॉलर) की वित्तीय मदद मांगी थी, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मदद करने के बजाय पाकिस्तान समेत 60 देशों पर नया 10% इम्पोर्ट टैरिफ लगा दिया. पाकिस्तान के लिए यह किसी सदमे से कम नहीं है. एक तरफ अपनी चरमराती अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए वह अमेरिका के आगे हाथ फैला रहा है. वहीं, ट्रंप प्रशासन के इस कड़े फैसले ने उसकी कमर और तोड़ दी है.

अमेरिका के सामने पाक ने फैलाए हाथ

पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट से मुलाकात कर 10 अरब डॉलर (लगभग 96000 करोड़ रुपये) की द्विपक्षीय 'एक्सचेंज स्टेबेलाइजेशन सपोर्ट फेसिलिटी' मांगी थी. पाकिस्तान को ये पैसे अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए चाहिए थे, जो इस वक्त बेहद नाजुक स्थिति में है. पाकिस्तान को अगर ये पैसे मिल जाते, तो वह इसका इस्तेमाल पाकिस्तानी रुपये को पूरी तरह से क्रैश होने से बचाने और IMF के कर्ज के बोझ को कम करने के लिए करता. 

पाकिस्तान को थी काफी उम्मीद

पाकिस्तान ने हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाई थी. उसे लगा था कि इसके बदले शायद वह अमेरिका से और बड़ी मदद मांग सकता है. पाकिस्तान को उम्मीद थी कि उसे अमेरिका की तरफ से आर्थिक मदद मिल जाएगी, लेकिन इसके उलट ट्रंप प्रशासन ने जबरन श्रम कानून के तहत पाकिस्तान के एक्सपोर्ट पर 10% का अतिरिक्त टैक्स लगा दिया है. अमेरिका, पाकिस्तान के कपड़ा और चमड़ा उद्योगों के लिए सबसे बड़ा खरीदार है. ऐसे में 10% टैक्स बढ़ने से पाकिस्तानी सामान अमेरिका में महंगे हो जाएंगे. इससे उनकी मांग कम हो सकती है और ऑर्डर्स कैंसिल हो सकते हैं.

ट्रंप का नया टैरिफ बम

अमेरिका ने अपने 60 प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर्स से होने वाले आयात पर 10% से 12.5% के बीच टैरिफ वसूलने का फैसला किया है. पाकिस्तान के साथ-साथ इसका असर चीन, भारत और यूरोपीय संघ जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ेगा. अमेरिका उन देशों से आयात कम या बंद करना चाहता है, जहां मैन्युफैक्चरिंग में श्रम नियमों का उल्लंघन होता हो.

अमेरिका का कहना है कि विकासशील देशों में सस्ते और जबरन श्रम के चलते उत्पादन की लागत काफी कम होती है इसलिए वहां के उत्पाद अमेरिकी बाजारों में सस्ते बिकते हैं. इससे अमेरिकी कंपनियों और श्रमिकों को भारी नुकसान पहुंचता है.  ट्रंप का यह फैसला भारत के टेक्सटाइल, जेम्स एंड जूलरी और आईटी जैसे बड़े एक्सपोर्टर्स के लिए भी किसी बड़े झटके से कम नहीं है. 

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