Devshayani Ekadashi: आज आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जा रहा है. आज से भगवान विष्णु चार माह के लिए पालाक लोक में योगनिद्रा यानी विश्राम करने चले गए हैं. इसी के साथ चार महीनों तक रहने वाले चातुर्मास का प्रारंभ हो गया है. इसका समापन 20 नवंबर को कार्तिक शुक्ल की देवउठनी एकादशी के दिन होगा. चातुर्मास के शुरू होने के साथ ही आज से शुभ और मांगलिक कामों पर रोक लगा दी गई है. अब विवाह समेत तमाम शुभ और मांगलिक काम देवउठनी एकादशी से शुरू होंगे.
भगवान विष्णु जब योगनिद्रा में होते हैं, तो उनकी पूजा और व्रत का महत्व और अधिक बढ़ जाता है. देवशयनी एकादशी पर भी विधि-विधान से भगवान विष्णु के पूजन और व्रत की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है. इस दिन पूजन और व्रत से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है. साथ ही मृत्यु के बाद आत्मा को वैकुंठ धाम में जगह मिलती है. देवशयनी एकादशी के दिन घर में एक स्थान पर दीपक जलाने का महत्व बहुत अधिक है, इसलिए आज शाम के समय इस एक जगह पर दीपक अवश्य जलाएं.
देवशयनी एकादशी पर तुलसी की पूजाजगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु को तुलसी बहुत ही प्रिय है, इसलिए इसको हरिप्रिया कहा जाता है. सनातन धर्म में तुलसी के पौधे को माता मानकर उनकी पूजा की जाती है. मान्यताओं के अनुसार, तुलसी के पौधे में माता लक्ष्मी वास करती हैं. ये पौधा घर में सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक माना गया है. एकादशी के अवसर पर तुलसी माता की पूजा बहुत विशेष मानी जाती है. इस दिन तुलसी माता की पूजा जीवन में बहुत ही शुभ परिणाम देती है.
शाम के समय तुलसी के पास जलाएं दीपकधार्मिक मान्यता के अनुसार, देवशयनी एकादशी की संध्या पर तुलसी के पास घी के दीपक जलाना विशेष शुभ होता है. आज शाम को आप अपनी श्रद्धा के अनुसार, 11 दीपक, 21 दीपक, 51 दीपक जला सकते हैं. इस दिन दीपदान करने से भगवान विष्णु और माता तुलसी की कृपा प्राप्त होती है. तुलसी के पास विधि-विधान से घी का दीपक जलाने और मंत्र जाप करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आगमन होता है. जीवन में आने वाली आर्थिक बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.