E20 Petrol: Balrampur Chini Mills समेत किन चीनी कंपनियों की बदली किस्मत
et July 27, 2026 02:42 PM
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बाद सोशल मीडिया पर E20 जनता पार्टी ने भी जन्म लिया है. इसके पीछे कौन है ये तो नहीं पता लेकिन की रिपोर्ट के मुताबिक, E20 Janta Party की मांग है कि इस मामले में नितिन गडकरी को इस्तीफा देना चाहिए और पार्टी E20 के खिलाफ नहीं है लेकिन लोगों को E20 पेट्रोल विकल्प के रूप में मिलना चाहिए, इसके साथ 100% पेट्रोल का भी ऑप्शन होना चाहिए. बता दें कि E20 के बाद से देश विदेशी मुद्रा की बचत जरूर कर पाया है, हालांकि तेल पर निर्भरता इस दौरान बढ़ गई है. लेकिन Balrampur Chini Mills Share , Triveni Engineering और Dwarikesh Sugar जैसी चीनी कंपनियों को काफी फायदा हुआ है. इन कंपनियों को फायदा तो हुआ ही है साथ ही इनकी बैलेंस शीट भी सुधरी है. इन्हीं के साथ बाकी चीनी कंपनियों की भी बैलेंस शीट में सुधार देखा गया है.

E20 पर नई बहसरायपुर के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ प्रेमराज देबता ने कुछ महीने पहले Maruti Suzuki Grand Vitara Hybrid खरीदी थी. लेकिन कुछ ही महीनों में उनकी कार में "Engine Malfunction" की चेतावनी आने लगी. सड़क पर वाहन बंद होने के बाद जब कार की जांच हुई तो फ्यूल के सैंपल में जेली जैसा पदार्थ मिलने का दावा किया गया.

इसके बाद कई महीनों तक ये विवाद चलता रहा कि समस्या वाहन में थी, फ्यूल में थी या किसी अन्य वजह से. मामला आखिरकार कंज्यूमर कोर्ट तक पहुंचा, जहां वाहन बदलने और मुआवजा देने का आदेश दिया गया. हालांकि मारुति सुजुकी ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है.

ये मामला सिर्फ एक उपभोक्ता की शिकायत तक सीमित नहीं रहा. इसने E20 पेट्रोल पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

E20 से आम उपभोक्ता को फायदा मिला?सरकार का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम का उद्देश्य केवल पेट्रोल की कीमत कम करना नहीं, बल्कि इंपोर्टेड कच्चे तेल पर निर्भरता घटाना और विदेशी मुद्रा बचाना भी है.

हालांकि देशभर में E20 पेट्रोल लागू होने के बाद भी पेट्रोल की रिटेल कीमतों में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं आई. ऐसे में आम उपभोक्ता के बीच ये सवाल लगातार उठ रहा है कि अगर कीमतें नहीं घटीं, तो इस नीति का सीधा फायदा आखिर किसे मिला.

सरकार की विदेशी मुद्रा बचत का दावा सही है?सरकार के मुताबिक पिछले 10 साल में एथेनॉल ब्लेंडिंग से लगभग 1.55 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है. लेकिन सरकारी आंकड़े ये भी बताते हैं कि इसी दौरान भारत की कच्चे तेल पर इंपोर्ट निर्भरता 83% से बढ़कर 90% से अधिक हो गई.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत हर साल करीब 150 से 200 अरब डॉलर का कच्चा तेल इंपोर्ट करता है. ऐसे में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग से अनुमानित 3 अरब डॉलर की बचत कुल इंपोर्ट बिल का केवल छोटा हिस्सा बनती है.

इसी वजह से कुछ विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या ये बचत उन लागतों के मुकाबले पर्याप्त है, जिनका सामना उपभोक्ताओं और अर्थव्यवस्था के दूसरे हिस्सों को करना पड़ रहा है.

किन चीनी कंपनियों की किस्मत बदली?करीब एक दशक पहले तक कई चीनी मिलें महंगे गन्ने, अधिक उत्पादन, कमजोर बैलेंस शीट और भारी कर्ज जैसी समस्याओं से जूझ रही थीं. इसके बाद सरकार ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के जरिए एथेनॉल खरीद की व्यवस्था मजबूत की, ब्लेंडिंग टारगेट बढ़ाए. इसका असर कई कंपनियों के प्रदर्शन में दिखाई दिया.

Balrampur Chini Mills का रेवेन्यू 6,000 करोड़ से ऊपर पहुंचा और मुनाफा भी मजबूत हुआ.
Triveni Engineering के कारोबार और शेयरों में भी वृद्धि दर्ज की गई.
Dwarikesh Sugar ने कर्ज घटाया और वित्तीय स्थिति में सुधार किया.

इस तरह एथेनॉल ने चीनी उद्योग को एक ऐसा बाजार दिया, जहां मांग पहले की तुलना में कहीं अधिक स्थिर और अनुमानित हो गई. हालांकि इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चर्स असोसिएशन (ISMA) का कहना है कि इसे केवल चीनी मिलों को मिला फायदा मानना सही नहीं होगा. संगठन के अनुसार इस कार्यक्रम से किसानों की इनकम स्थिर हुई और इंपोर्टेड कच्चे तेल का घरेलू विकल्प विकसित हुआ.

एथेनॉल प्रोडक्शन अब जरूरत से ज्यादाएक नई चुनौती है. रेटिंग एजेंसी CareEdge Ratings के अनुसार देश की एथेनॉल प्रोडक्शन क्षमता घरेलू मांग से आगे निकल रही है. E20 ब्लेंडिंग और अन्य इंडस्ट्री जरूरतों के बाद भी बड़ी मात्रा में उत्पादन क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है. इससे डिस्टिलरी उद्योग के सामने अतिरिक्त क्षमता की चुनौती खड़ी हो रही है. भारत फिलहाल पहली पीढ़ी (1G) के एथेनॉल के एक्सपोर्ट की अनुमति नहीं देता. ऐसे में अतिरिक्त उत्पादन के लिए सबसे बड़ा खरीदार अब भी सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां ही बनी हुई हैं.

सरकार ने फिलहाल E25 और E30 की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला टाल रखा है और E20 को ही वर्तमान लक्ष्य बनाए रखा है.
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