Sawan Shivling Jal Abhishek: सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय न करें यह एक बड़ी भूल, जानें जल अर्पित करने का सही समय और नियम
TV9 Bharatvarsh July 30, 2026 10:42 AM

Sawan Shiv Puja: सनातन धर्म में सावन के महीने का विशेष महत्व होता है. इस पावन महीने में हर दिन लाखों भक्त शिवलिंग पर जल चढ़ाकर महादेव की कृपा प्राप्त करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर जल अर्पित करने से मन को शांति मिलती है और जीवन की समस्याएं समाप्त होती हैं. हालांकि, जल चढ़ाते समय सही समय और सही नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक होता है. गलत तरीके या गलत समय पर जल अर्पित करने से पूजा का पूरी नहीं मानी जाती है इसलिए जल अर्पित करने से पहले उससे जुड़ी मुख्य बातों को जान लेना बहुत जरूरी है.

जल अर्पित करने का शुभ समय

सावन में भगवान शिव पर जल अर्पित करने का सबसे उत्तम समय सुबह माना जाता है. सुबह ब्रह्म मुहूर्त से लेकर प्रातः 10 बजे तक का समय जल चढ़ाने के लिए सबसे शुभ होता है. इस समय वातावरण में शुद्धता और शांति रहती है. इसके अलावा शाम के समय प्रदोष काल में जल अर्पित करना भी बहुत फलदाई माना गया है. प्रदोष काल यानी सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक का समय शिव पूजा के लिए श्रेष्ठ होता है. इन निर्धारित समय पर जल चढ़ाने से महादेव अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं.

खड़े होने की दिशा और पात्र का

शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय अपनी दिशा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. हमेशा दक्षिण दिशा में खड़े होकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके ही जल अर्पित करें. उत्तर दिशा को भगवान शिव और माता पार्वती का निवास स्थान माना जाता है. भूलकर भी पूर्व या उत्तर दिशा में खड़े होकर जल न चढ़ाएं. जल अर्पित करने के लिए तांबे, पीतल या चांदी के बर्तन का प्रयोग करना उत्तम होता है. एक बात का विशेष ध्यान रखें कि तांबे के बर्तन में दूध डालकर कभी भी अर्पित न करें. वैसे तो तांबे के पात्र से शुद्ध जल चढ़ाना चाहिए यदि आपके पास तांबे का लौटा न हो तो आप चांदी या पीलक का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

जल चढ़ाने की सही विधि और नियम

जल अर्पित करते समय उसकी धारा पतली और निरंतर बनी रहनी चाहिए.

सबसे पहले जल जलाधारी के दाएं भाग पर चढ़ाएं जो श्री गणेश का स्थान है.

इसके बाद बाएं भाग पर जल चढ़ाएं जो श्री कार्तिकेय का स्थान है.

फिर बीच की धारा पर जल अर्पित करें जो माता अशोक सुंदरी का स्थान है.

इसके बाद जलाधारी के गोल घेरे पर जल चढ़ाएं जो माता पार्वती का हस्तकमल है.

अंत में मुख्य शिवलिंग पर धीरे-धीरे जल अर्पित करें.

बचा हुआ जल बहने वाले स्थान पर लगाएं और इस दौरान निरंतर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करते रहें.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी प्रकार के सुझाव के लिए astropatri.com पर संपर्क करें.

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