Sawan Ki Katha: आज से सावन माह की शुरुआत हो गई है. ये पूरा महीना अगले महीने 28 अगस्त की सावन पूर्णिमा तक चलेगा. सावन के पहले दिन आज मंदिरों और शिवालयों में भारी भीड़ उमड़ी हुई है. सावन का महीना महादेव की भक्ति और पूजा-अर्चना का सबसे शुभ और पवित्र अवसर माना जाता है. ये माह भोले भंडारी को बहुत ही प्रिय है. इस माह में सृष्टि का कार्यभार भोलेनाथ ही संभालते हैं.
धार्मिक मान्यता कि सावन में महादेव पूजा-अर्चना करने से सारी इच्छाएं पूर्ण करते हैं. इस माह में जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का विशेष महत्व होता है. सावन में विधि-विधान से जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव बहुत प्रसन्न होते हैं और जीवन के सारे कष्ट दूर करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सावन का माह ही महादेव को क्यों समर्पित किया गया है? इसके पीछे एक पवित्र कथा है. आइए विस्तार से जानते हैं.
सावन की पौराणिक कथासावन माह की कथा समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है. कथा के अनुसार, सावन माह में ही देवताओं और असुरों द्वारा समुद्र मंथन की शुरुआत की गई थी. इस सागर मंथन से कुल 14 रत्न प्राप्त हुए थे, लेकिन सबसे पहले निकला था हलाहल विष. इस विष में संसार जो जला देने की शक्ति थी. तब संसार की रक्षा करने के लिए देवताओं और असुरों ने महादेव से गुहार लगाई. महादेव ने संसार की रक्षा के लिए सारा विष पी लिया और उसको अपने कंठ में धारण कर लिया.
विष के प्रभाव से महादेव का पूरा कंठ निला पड़ा गया और वो नीलकंठ कहलाने लगे. तब से ही महादेव का संसार के प्रति त्याग का प्रतीक सावन का ये महीना महादेव समर्पित है. विषपान करने के बाद उसके प्रभाव से महादेव के शरीर का तापमान बढ़ने लगा था. तब सभी देवताओं ने महादेव का जलाभिषेक किया था. इससे शिव जी के शरीर से विष का प्रभाव समाप्त हुआ था. तब से सावन मेंं शिव जी के जलाभिषेक की पंरपरा चली आ रही है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.