दुनिया के कई मुस्लिम देशों में संपत्ति के बंटवारे के लिए शरिया कानून का पालन किया जाता है. इस कानून में पहले से तय नियम हैं कि किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसकी संपत्ति किसे और कितना हिस्सा मिलेगा. आमतौर पर बेटों को बेटियों के मुकाबले ज्यादा हिस्सा मिलता है और दूसरे रिश्तेदारों के अधिकार भी तय होते हैं. लेकिन अब एक नया ट्रेंड सामने आ रहा है. खाड़ी देशों के कई अमीर परिवार अपनी संपत्ति का बंटवारा शरिया कानून के बजाय इंग्लैंड के कानून के तहत करने की कोशिश कर रहे हैं.
इसके लिए वे लंदन में वसीयत बनवा रहे हैं या जर्सी जैसे क्षेत्रों में ट्रस्ट बना रहे हैं. इसका मकसद शरिया कानून से बचना नहीं, बल्कि अपनी इच्छा के मुताबिक संपत्ति का बंटवारा करना है. खासकर लोग चाहते हैं कि बेटियों और बेटों को बराबर हिस्सा मिले या परिवार की परिस्थितियों के हिसाब से संपत्ति बांटी जाए. रिपोर्ट के मुताबिक, खाड़ी देशों के अमीर परिवारों में अंग्रेजी कानून के तहत वसीयत बनाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि आज की नई पीढ़ी पहले से ज्यादा वैश्विक सोच रखती है.
जरूरतों के हिसाब से हो बंटवाराफाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कई परिवारों के बच्चे विदेशों में रहते हैं, पढ़ते हैं या कारोबार करते हैं. ऐसे में वो चाहते हैं कि संपत्ति का बंटवारा परिवार की जरूरतों के हिसाब से हो, न कि केवल तय धार्मिक नियमों के आधार पर. कुछ परिवारों में सिर्फ बेटियां हैं, कहीं तलाक या दूसरी शादी जैसी स्थितियां हैं, तो कहीं कारोबारी संपत्ति को एक ही उत्तराधिकारी के पास रखना जरूरी माना जाता है.
खाड़ी के अमीरों का नया फैसला (Getty Image)
यही वजह है कि कई परिवार इंग्लैंड के कानून या जर्सी ट्रस्ट का सहारा ले रहे हैं, जहां वसीयत बनाने वाले व्यक्ति को अपनी संपत्ति बांटने की ज्यादा आजादी मिलती है. हालांकि कानूनी विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि यह तरीका हर मामले में काम करेगा, ऐसा जरूरी नहीं है. यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि संपत्ति किस देश में है और वहां के कानून क्या कहते हैं.
शरिया कानून में ऐसा क्या है?शरिया कानून में विरासत के नियम पहले से तय होते हैं. उदाहरण के लिए, सामान्य स्थिति में बेटे को बेटी के मुकाबले दोगुना हिस्सा मिलता है. अगर किसी व्यक्ति की केवल एक बेटी है, तो पूरी संपत्ति उसे नहीं मिलती, बल्कि बाकी हिस्सा दूसरे कानूनी वारिसों को भी जा सकता है. कई मामलों में एक से ज्यादा पत्नियां, सौतेले बच्चे या बड़ी ज्वॉइंट फैमिली होने पर संपत्ति का बंटवारा और मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि कुछ परिवार अपनी परिस्थितियों के अनुसार अलग व्यवस्था चाहते हैं.
लंदन का कानून क्यों पसंद आ रहा है?इंग्लैंड के कानून में वसीयत बनाने वाले व्यक्ति को काफी हद तक यह अधिकार होता है कि वह अपनी संपत्ति किसे और कितना देना चाहता है. यानी वह अपनी इच्छा के मुताबिक बेटियों और बेटों को बराबर हिस्सा दे सकता है या किसी खास सदस्य को ज्यादा हिस्सा दे सकता है. यही आजादी कई खाड़ी देशों के अमीर परिवारों को आकर्षित कर रही है. कुछ कानूनी विशेषज्ञ इसे शरिया-लाइट रणनीति भी कहते हैं, क्योंकि परिवार धार्मिक मूल्यों का सम्मान करते हुए भी अपनी जरूरत के मुताबिक संपत्ति की योजना बना रहे हैं.
जर्सी ट्रस्ट की मांग क्यों बढ़ रही है?सिर्फ अंग्रेजी वसीयत ही नहीं, बल्कि जर्सी ट्रस्ट भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. ट्रस्ट में संपत्ति को पहले से तय नियमों के अनुसार रखा जाता है और यह तय किया जा सकता है कि किसे, कब और कितना लाभ मिलेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में जर्सी ट्रस्ट के गैर-जर्सी ग्राहकों में मिडिल ईस्ट के लाभार्थियों की हिस्सेदारी 10.6% थी, जो 2024 में बढ़कर 11.8% हो गई.
क्या यह तरीका हर मामले में काम करेगा?इस पर कानूनी विशेषज्ञों की राय एक जैसी नहीं है. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अगर संपत्ति ब्रिटेन के बाहर है, तो उस देश के कानून भी लागू हो सकते हैं. इसलिए केवल इंग्लैंड में वसीयत बना लेने से हर जगह वही नियम लागू होंगे, इसकी कोई गारंटी नहीं है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि संपत्ति किस देश में है और वहां का उत्तराधिकार कानून क्या कहता है.
फायदे के साथ जोखिम भीलंदन में वसीयत बनवाने से संपत्ति बांटने की ज्यादा आजादी मिलती है, लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं. ऐसा करने पर संपत्ति से जुड़ी जानकारी ब्रिटेन के नियमों के तहत साझा करनी पड़ सकती है, जिससे कागजी कार्रवाई और सरकारी जांच बढ़ जाती है. साथ ही, गोपनीयता कम हो सकती है और टैक्स से जुड़े नियम भी पहले के मुकाबले ज्यादा सख्त हो गए हैं. इसलिए सिर्फ टैक्स बचाने या आसानी के लिए लंदन में वसीयत बनवाना हमेशा फायदेमंद नहीं माना जाता.
लंदन में वसीयत के फायदे-नुकसान (Getty Image)
क्या करना चाहिए?अगर आप विदेश में वसीयत बनवाने की सोच रहे हैं, तो सिर्फ नाम या जगह देखकर फैसला न लें. सबसे पहले यह तय करें कि आपकी संपत्ति किस-किस देश में है और वहां के कानून क्या कहते हैं. बेटों और बेटियों के अधिकारों के साथ-साथ परिवार के भीतर स्पष्ट नियम और उत्तराधिकार की योजना पहले से तय करें. जरूरत पड़ने पर अलग-अलग देशों की संपत्तियों के लिए अलग कानूनी व्यवस्था अपनाएं. विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ लंदन में वसीयत बनवा लेने से हर देश में संपत्ति विवाद अपने आप खत्म नहीं हो जाते.