देश में नेशनल हाईवे का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है. साथ ही टोल कलेक्शन भी लगातार रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रहा है. संसद में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक सवाल के जवाब में बताया कि पिछले तीन सालों में राष्ट्रीय राजमार्गों से फास्टटैग के जरिए करीबन 1.87 लाख करोड़ रुपये से अधिक का टोल वसूला गया है. इस राशि में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. अगर इस कलेक्शन पर रोजाना के टोल वसूली पर गौर करे तो रोजाना 171 करोड़ रुपये का टोल फास्टटैग से NHAI ने वसूला.
2024-25 में किन राज्यों से सबसे ज्यादा टोल मिला?अब सवाल यह है कि राष्ट्रीय राजमार्ग से जितना भी टोल मिलता है क्या वह राज्य सरकारों को भी मिलता है, तो इसका जवाब है नहींय यह सीधे भारत सरकार की कंसोलिडेटेड फंस में जाता है. फिर बजटीय आवंटन के जरिए पूरे देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण, रखरखाव और विस्तार पर खर्च किया जाता है.
कुछ समय पहलेकेरल ने यह मांग उठाई थी कि उसने राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास में लगभग 5,800 करोड़ रुपये का योगदान दिया है, इसलिए उसे टोल का हिस्सा मिलना चाहिए. लेकिन सरकार ने कहा कि किसी राज्य को अलग से टोल राजस्व देने की कोई नीति नहीं है. हालांकि सरकार ने माना कि केरल में भूमि अधिग्रहण की लागत लगभग 23,350 करोड़ रुपये रही. राज्य के योगदान से परियोजनाओं को प्राथमिकता मिली
FASTag से कितनी टोल की हुई कमाई ?सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 28 जुलाई को कांग्रेस के राज्यसभा सांसद के सवाल के जवाब में बताया कि इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम FASTag से होने वाली आय भी लगातार बढ़ रही है. 2023-24 में 55,882.12 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी. 2024-25 में 61,408.15 करोड़ और 2025-26 में 70,278.18 करोड़ रुपये मिले थे. यानी केवल तीन वर्षों में FASTag के माध्यम से 1,87,568.45 करोड़ रुपये का टोल वसूला जा चुका है.

सरकार के मुताबिक 16 फरवरी 2021 से राष्ट्रीय राजमार्गों के सभी टोल प्लाजा को FASTag आधारित बनाया गया. इसका सबसे बड़ा असर प्रतीक्षा समय पर पड़ा. पहले मैनुअल टोल में औसतन 12.23 मिनट टोल प्लाजा से निकलने में लगते थे.अब इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन के जरिए औसतन करीब 40 सेकंड में वाहन टोल पार कर लेते हैं.
सरकार का कहना है कि इससे वाहन चालकों का समय भी बचा और टोल प्लाजा पर जाम भी काफी कम हुआ. सरकार ने यह भी बताया कि वह टोल प्लाजा पर भीड़ की निगरानी के लिए GIS आधारित सिस्टम का भी इस्तेमाल कर रही है. हालांकि, सरकार के तमाम दावों के बावजूद हकीकत कुछ और है. टोल प्लाजाओं पर अब भी लंबी लाइन देखने को मिलती है.
सरकार टोल प्लाजाओं पर कौन सी प्रणाली लागू करने जा रही है?सरकार अब मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) प्रणाली लागू कर रही है. इसमें ANPR (ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्नाइजेशन), AI आधारित कैमरे और FASTag (RFID) मिलकर व्हीकल की पहचान करेंगे और टोल अपने आप खाते से कट जाएगा. इस व्यवस्था में गाड़ी को रुकने की जरूरत नहीं होगी, गति धीमी नहीं करनी पड़ेगी, किसी विशेष लेन में जाने की आवश्यकता नहीं होगी.
फिलहाल 17 टोल प्लाजाओं पर यह परियोजना शुरू की जा चुकी है, जिनमें से 5 प्लाजा पूरी तरह चालू हैं. ये गुजरात, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में स्थित हैं. इसके अलावा 104 और टोल प्लाजा इस नई प्रणाली के लिए चिन्हित किए गए हैं.सरकार ने यह भी बताया कि उसने टोल नियमों में भी कई जरूरी बदलाव किए ताकिवाहन चालकों पर आर्थिक बोझ कम किया जा सके.
टोल नियमों में सरकार ने कौन से संशोधन किए?फिलहाल भारत में टोल सिस्टम पूरी तरह से डिजिटल हो रहा है. सरकार की टोल आय भी लगातार बढ़ रही है और अब अगला लक्ष्य पूरी तरह बैरियर-लेस टोल सिस्टम लागू करना है. इससे वाहन चालकों का समय बचेगा, ईंधन की खपत घटेगी और टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम में और कमी आएगी. इससे लोग समय से अपनी मंजिल यानी गंतव्य तक पहुंच सकेंगे.