दिल्ली सरकार ने विकासपुरी स्थित एक प्राइवेट स्कूल के मैनेजमेंट को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. शिक्षा निदेशालय (DoE) द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में स्कूल में छात्रों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर खतरे, वित्तीय अनियमितताएं और प्रशासनिक उल्लंघन सामने आए हैं. निरीक्षण में पाया गया कि स्कूल बिना अग्नि सुरक्षा स्वीकृति (फायर NOC) के 43 कक्षाओं का अवैध रूप से संचालन कर रहा था.
इसके अतिरिक्त परिसर में बड़े पैमाने पर अवैध टिन-शेड संरचनाएं निर्मित की गई थीं, बिना अनुमति भूजल का दोहन किया जा रहा था, शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा था, अभिभावकों से मनमाने ढंग से शुल्क वृद्धि की जा रही थी और वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं का संचालन बिना वैध मान्यता के किया जा रहा था.
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने शिक्षा निदेशालय को स्कूल मैनेजमेंट के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. स्कूल को अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए 7 दिनों का समय दिया गया है. निर्धारित अवधि में संतोषजनक उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में सरकार स्कूल का तत्काल अधिग्रहण करने की कार्रवाई करेगी.
बच्चों की सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहींइस अवसर पर शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा की हमारी सरकार बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगी. यह स्कूल बिना अग्नि सुरक्षा स्वीकृति के दर्जनों अवैध कक्षाओं का संचालन कर हजारों विद्यार्थियों के जीवन को प्रतिदिन खतरे में डाल रहा था.
कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगी सरकारउन्होंने कहा कि जब कोई संस्था खतरनाक और अवैध निर्माण करती है, सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग करती है, शिक्षकों का शोषण करती है तथा कानून की खुलेआम अवहेलना करती है, तब सरकार निर्णायक कार्रवाई करने में कोई संकोच नहीं करेगी. विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर सरकार विद्यालय के प्रबंधन का पूर्ण अधिग्रहण करने के लिए भी तैयार है.
निरीक्षण में सामने आए प्रमुख उल्लंघनअग्नि सुरक्षा और भवन निर्माण संबंधी गंभीर अनियमितताएं: स्कूल के पास केवल 39 कमरों के लिए फायर एनओसी उपलब्ध थी, जबकि परिसर में 82 कमरों का संचालन किया जा रहा था. अर्थात 43 कक्षाएं बिना किसी फायर एनओसी के संचालित की जा रही थीं. इसके अलावा स्कूल ने बिना अनुमति 30 कमरों वाला विशाल टिन-शेड, एक अवैध बेसमेंट और तीसरी मंजिल का भी निर्माण किया.
आपातकालीन निकासी मार्ग अवरुद्ध: कुछ कक्षाओं में केवल एक ही निकास द्वार उपलब्ध था और अग्निशमन वाहनों एवं अन्य आपातकालीन सेवाओं के लिए निर्धारित मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध पाया गया.
भूजल का अवैध दोहन: स्कूल कैंपस में बिना किसी वैधानिक अनुमति के बोरवेल संचालित किया जा रहा था, जो पर्यावरणीय नियमों एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है.
वरिष्ठ माध्यमिक स्तर की मान्यता खत्म होने के बावजूद संचालन: स्कूल की वरिष्ठ माध्यमिक स्तर की अस्थायी मान्यता 31 मार्च 2023 को खत्म हो चुकी थी. इसके बावजूद पिछले तीन सालों से स्कूल अवैध रूप से वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं का संचालन कर रहा था, जिससे विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य संकट में पड़ सकता है.
अवैध शुल्क वृद्धि और अतिरिक्त वसूली: स्कूल ने शिक्षा निदेशालय की स्वीकृति के बिना कई बार फीस में वृद्धि की. कोविड-19 महामारी के दौरान भी 20 से 25 प्रतिशत तक अवैध शुल्क वृद्धि की गई तथा तथाकथित ‘स्मार्ट क्लासरूम शुल्क’ को मनमाने ढंग से दोगुना कर अभिभावकों से अतिरिक्त धन वसूला गया.
शिक्षकों का शोषण: पर्याप्त वित्तीय अधिशेष होने के बावजूद स्कूल ने शिक्षकों को सरकारी वेतनमान के अनुरूप वेतन नहीं दिया तथा कई मामलों में वेतन भुगतान चार-चार महीने तक लंबित रखा.
प्रबंधन में पारदर्शिता का अभाव एवं हितों का टकराव: स्कूल की मैनेजमेंट कमेटी में एक ही परिवार के निकट संबंधियों का वर्चस्व पाया गया, जिससे हितों के टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई. निरीक्षण के दौरान आवश्यक पहचान संबंधी दस्तावेज भी सत्यापन के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए.
प्रस्तावित कठोर कार्रवाईशिक्षा निदेशालय ने स्कूल मैनेजमेंट से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उसके विरुद्ध निम्नलिखित कार्रवाई क्यों न की जाए-
विद्यालय का सरकारी अधिग्रहण: दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम (DSEA), 1973 की धारा 20 के अंतर्गत विद्यालय के प्रबंधन का तत्काल सरकारी अधिग्रहण.
भूमि पट्टा (लीज़) निरस्त करने की संस्तुति: अत्यंत रियायती दर पर आवंटित सार्वजनिक भूमि का पट्टा तत्काल निरस्त करने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को अनुशंसा.