बांग्लादेश के कानून मंत्री एम असदुज्जमान ने गुरुवार (30 जुलाई 2026) को कहा कि पूर्व पीएम शेख हसीना को बांग्लादेश में कदम रखते ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि शेख हसीना को भारत से लौटने के बाद सीधे कोर्ट में पहुंचकर आत्मसमर्पण करने का मौका नहीं मिलेगा. यह बयान हसीना के एक न्यूज एजेंसी को दिए उस इंटरव्यू के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अपनी जान को खतरा होने के बावजूद वह दिसंबर तक अपने देश लौटने के लिए दृढ़ हैं.
शेख हसीना ने कही बांग्लादेश लौटने की बात
शेख हसीना ने कहा था, ‘हो सकता है कि मेरी हत्या कर दी जाए. हो सकता है कि मुझे गिरफ्तार कर लिया जाए. हो सकता है कि मुझे जेल भेज दिया जाए... मुझे अपनी किस्मत के बारे में पूरी जानकारी है. फिर भी, मैं वापस जाना चाहती हूं, क्योंकि मेरे लोग मुझे बुला रहे हैं.’ इस महीने की शुरुआत में उनके कुछ और इंटरव्यू सामने आए थे, जिनसे पता चला था कि वह अपनी पार्टी के सहयोगियों के साथ इस साल के आखिर तक बांग्लादेश लौटने की संभावना पर चर्चा कर रही हैं.
असदुज्जमां ने कहा कि शेख हसीना को लौटने का अधिकार है, लेकिन कानून अपना काम करेगा और हम कानून का उल्लंघन करते हुए कुछ भी नहीं करेंगे. मंत्री एम असदुज्जमान ने कहा, ‘मौत की सजा सुनाए जाने के बावजूद, बांग्लादेशी नागरिक होने के नाते अगर वह घर लौटकर कानून का सम्मान करते हुए आत्मसमर्पण करना चाहती हैं, तो हो सकता है कि ऐसा करने से पहले ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए. हम उस अधिकार का इस्तेमाल करेंगे, जो कानून ने हमें दिया है.’
कानून का इस्तेमाल करेगा बांग्लादेश: असदुज्जमान
जब उनसे पूछा गया कि अंतरिम सरकार द्वारा उनका पासपोर्ट रद्द किए जाने के बाद वह कैसे लौट सकती हैं, तो मंत्री असदुज्जमां ने कहा, ‘यह उनकी समस्या है, मेरी नहीं.’ उन्होंने कहा, ‘जब भी वह हमारे क्षेत्र में प्रवेश करेंगी, मैं कानून द्वारा मुझे प्रदत्त अधिकार का प्रयोग करूंगा.’ बांग्लादेश में छात्रों के नेतृत्व में हुए हिंसक सड़क प्रदर्शनों के बाद अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिर गई थी, जिसके बाद हसीना भागकर भारत पहुंच गईं.
अंतरिम सरकार के कार्यभार संभालने के बाद, एक विशेष अदालत ने आतंकवाद निरोधक कानून के तहत एक कार्यकारी आदेश द्वारा हसीना की राजनीतिक पार्टी ‘अवामी लीग’ को भंग कर दिया. नवंबर 2025 में, वर्ष 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई में उनकी भूमिका के लिए इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल द्वारा मानवता के विरुद्ध अपराधों का दोषी पाए जाने के बाद शेख हसीना को उनकी अनुपस्थिति में मृत्युदंड दिया गया.
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं ने उठाए सवाल
एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं ने इस प्रक्रिया को ‘खामियों से भरा’ बताया, जबकि संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं. इस साल की शुरुआत में बांग्लादेश में चुनाव हुए, जिसके बाद ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ सत्ता में आई और तारिक रहमान ने नए प्रधानमंत्री के तौर पर कार्यभार संभाला. बांग्लादेश कुछ समय से भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है, लेकिन भारत ने कहा है कि वह इस मामले पर विधिक रूप से विचार कर रहा है.