Shivling Abhishek Vidhi: सावन में शिवलिंग पर जल, दूध या पंचामृत… क्या सबसे पहले चढ़ाना चाहिए?
TV9 Bharatvarsh July 31, 2026 10:42 AM

Sawan Puja Steps: हिंदू धर्म में साल 2026 में पावन सावन महीने की शुरुआत 30 जुलाई को हो चुकी है. इस पूरे महीने में भक्त शिवलिंग का अभिषेक करके शिवजी को प्रसन्न करते हैं. हालांकि कई बार लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि शिवलिंग पर सबसे पहले जल चढ़ाना चाहिए, दूध चढ़ाना चाहिए या फिर पंचामृत अर्पित करना चाहिए. शिवपुराण और शास्त्रों के अनुसार पूजा की एक सही विधि बताई गई है. यदि सही नियम और क्रम से अभिषेक किया जाए तो पूजा का पूरा फल मिलता है.

शास्त्रों में बताया गया है कि शिवलिंग पर जल और पंचामृत अर्पित करने का एक खास तरीका होता है, जिसका पालन करने से महादेव अपने भक्तों से प्रसन्न होते हैं और उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं.

पूजा का पहला चरण: गंगाजल या शुद्ध जल का प्रयोग

शिवपुराण और शास्त्र सम्मत परंपरा के अनुसार, सबसे पहले शुद्ध जल या गंगाजल से शिवलिंग का प्रक्षालन यानी सफाई या शुद्धिकरण करना चाहिए. जिस प्रकार हम खुद स्नान करने से पहले शुद्ध जल का उपयोग करते हैं, ठीक उसी तरह महादेव को भी सबसे पहले जल से ही स्नान कराया जाता है. शिवलिंग पर सबसे पहले जल चढ़ाने से वह पूरी तरह से पवित्र हो जाता है. जल अर्पित करने से शिवजी की पूजा का पहला चरण पूरा होता है इसलिए किसी भी प्रकार की सामग्री या दूध चढ़ाने से पहले साफ जल से अभिषेक करना बहुत जरूरी माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, बिना जल से साफ किए कोई भी अन्य सामग्री चढ़ाना सही नहीं माना जाता है. सबसे पहले जल चढ़ाने से पूजा की शुरुआत सही तरीके से होती है.

दूध और पंचामृत से अभिषेक करने की सही विधि

जब शिवलिंग का शुद्ध जल से स्नान पूरा हो जाए, उसके बाद ही दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए. इन पांचों पवित्र चीजों को मिलाकर पंचामृत तैयार किया जाता है, जो शिवजी को बहुत पसंद है. जल से शुद्धिकरण के बाद पंचामृत अर्पित करने से शिवलिंग का पूर्ण अभिषेक होता है. पंचामृत से स्नान कराने का विधान शास्त्रों में बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. दूध और पंचामृत चढ़ाने से पूजा का फल प्राप्त होता है. ध्यान रहे कि पंचामृत अर्पित करते समय मन शांत रहे. जल से स्नान कराने के बाद ही पंचामृत चढ़ाने का नियम है. सही क्रम से किया गया यह अभिषेक महादेव को प्रसन्न करता है और पूजा को नियम अनुसार पूरा बनाता है.

दोबारा शुद्ध जल स्नान, बेलपत्र और चंदन अर्पण

पंचामृत स्नान कराने के बाद एक बार फिर से शिवलिंग को शुद्ध जल से स्नान कराना अनिवार्य होता है. दोबारा जल चढ़ाने से शिवलिंग पूरी तरह से स्वच्छ और साफ हो जाता है. जब पंचामृत पूरी तरह से धुल जाए और शिवलिंग साफ हो जाए, तब अंत में बेलपत्र और चंदन अर्पित किए जाते हैं. चंदन का लेप लगाने और बेलपत्र चढ़ाने से पूजा पूरी मानी जाती है. शास्त्रों के अनुसार यह अंतिम चरण बहुत जरूरी होता है क्योंकि इससे शिवलिंग की स्वच्छता बनी रहती है. अंत में बेलपत्र और चंदन चढ़ाने से शिवजी का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इस प्रकार जल, पंचामृत और फिर से जल चढ़ाकर बेलपत्र अर्पित करने की यह विधि पूरी तरह से शास्त्र सम्मत और सही मानी जाती है.

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