Sawan Rudrashtakam Path: श्रीराम ने किया था रुद्राष्टकम का पाठ, जानें सावन में इसे कब और कैसे पढ़ें
TV9 Bharatvarsh July 31, 2026 03:43 PM

Sawan Rudrashtakam Path: शिव जी की अराधना का सावन महीना चल रहा है. भक्त मंदिरों और शिवालयों में महादेव की विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं. उनका जलाभिषेक और रुद्राभिषेक किया जा रहा है. सावन में भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से जीवन में महादेव की कृपा और बहुत शुभ फल प्राप्त होते हैं. सावन के समय घर पर भी शिव जी की उपासना शुभ फल प्रदान करती है.

यही कारण है कि सावन में शिव जी के भक्त घर में शिव पुराण का पाठ का पाठ और महादेव के मंत्रों का जाप करते हैं. सावन के समय श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र का पाठ करना भी बहुत पुण्यदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र का पाठ किया था. आइए जानते हैं कि श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र क्या है और इसको सावन में कब और कैसे पढ़ें?

गोस्वामी तुलसीदास ने रचा है ये स्तोत्र

श्री रुद्राष्टकम भगवान शिव की स्तुति में रचित एक प्रसिद्ध स्तोत्र माना जाता है. इसके रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी माने जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लंका पर चढ़ाई करने से पहले भगवान श्री राम ने रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना की थी. उसी दौरान भगवन श्रीराम ने शिव जी की अराधना करते समय रुद्राष्टकम का पाठ किया था. रुद्राष्टकम के नियमित पाठ से मन शांत होता है.

सावन में किस समय करें रुद्राष्टकम का पाठ?

सावन में रुद्राष्टकम का पाठ करने के लिए सुबह का समय बहुत उत्तम माना जाता है. सावन का महीना शिव जी की भक्ति का है, इसलिए इस महीने में सुबह और शाम नियमित रूप से रुद्राष्टकम का पाठ करना विशेष फलदायी माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि लगातार 7 दिनों तक विधि-विधान से रुद्राष्टकम का पाठ करने से भगवान शिव की कृपा मिलती है.

रुद्राष्टकम का पाठ करने की विधि

सावन में रोजाना सूर्योंदय से पहले उठकर स्नान आदि कर लें. इसके बाद साफ वस्त्र धारण करें. फिर सूर्य देव को जल चढ़ाएं. इसके बाद पूजा स्थान पर दीपक जलाकर शिव जी और मां पार्वती का स्मरण करें. शिव जी को जल अर्पित करने के बाद श्रद्धा भाव से उनकी आराधना और आरती करें. इसके बाद शांत मन से श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र का पाठ करें. पाठ पूरा करने के बाद महादेव को खीर, फल या मिठाई का भोग अर्पित करें. साथ ही मनोकामनाओं को पूरा करने की प्रार्थना करें.

रुद्राष्टकम स्तोत्र

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।

निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहं।।1।।

निराकारमोंकारमूलं तुरीयं, गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं।

करालं महाकाल कालं कृपालं, गुणागार संसारपारं नतोऽहं।।2।।

तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं, मनोभूत कोटि प्रभा श्रीशरीरं।

स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा, लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजंगा।।3।।

चलत्कुंडलं भ्रू सुनेत्रं विशालं, प्रसन्नाननं नीलकंठं दयालं।

मृगाधीशचर्माम्बरं मुंडमालं, प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि।।4।।

प्रचंडं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं, अखंडं अजं भानुकोटिप्रकाशं।

त्रयः शूल निर्मूलनं शूलपाणिं, भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यं।।5।।

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी, सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी।

चिदानन्द संदोह मोहापहारी, प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी।।6।।

न यावद् उमानाथ पादारविन्दं, भजंतीह लोके परे वा नराणां।

न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं, प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं।।7।।

न जानामि योगं जपं नैव पूजां, नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यं।

जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं, प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो।।8।।

रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।

ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति।।9।।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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