Hariyali Teej 2026: विवाह के बाद बेटी क्यों मायके में मनाती है पहली तीज? राधा रानी से है संबंध
TV9 Bharatvarsh July 31, 2026 05:42 PM

Hariyali Teej Vrat: सनातन धर्म में तीज का व्रत बहुत विशेष और महत्वपूर्ण माना जाता है. सावन में हरियाली तीज मनाई जाती है. हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन हरियाली तीज का व्रत रखा जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त के दिन रखा जाएगा. ये व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत खास होता है. इस दिन व्रत रखने और शिव जी व माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने पर सुहागिनों को अंखड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है. पति की आयु बढ़ती है.

यही नहीं हरियाली तीज का व्रत कुंवारी कन्याएं भी रखती हैं. मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है. इस पर्व का महत्व नवविवाहित बेटियों के लिए बहुत बढ़ जाता है और वो इस पर्व बहुत ही खास तरह से मनाती हैं. प्राचीन परंपराओं के अनुसार, नवविवाहित बेटी अपनी पहली हरयाली तीज अपने मायके में मनाती है. आइए जानते हैं इस परंपरा के पीछे की धार्मिक वजह.

मायके में मनाती हैं तीज

भारतीय संस्कृति कहती है कि लड़की का मायका उसके जीवन में विशेष स्थान रखता है, क्योंकि वहीं वो अपने बचपन से लेकर विवाह तक का समय बिताती है. मायके से लड़की का भावानात्मक जुड़ाव बहुत अधिक होता है. जब बेटी पहली बार तीज मनाती है, तो उसको मायके की याद न आए इसलिए वो इस दौरान मायके में ही रहती है.

नवविवाहित बेटी को मायके के लोग सम्मानपूर्वक घर लाते हैं और उसे उपहार में श्रृंगार की चीजें, नए कपड़े, घेवर, मिठाइयां और गहने देते हैं. इस परंपरा को ‘सिंधारा’ या ‘सिंजारा’ कहते हैं. ये सिर्फ एक पंरपरा भर नहीं, बल्कि मायके के लोगों का आशीर्वाद होता है.

राधा रानी तीज पर आती हैं मायके

हरियाली तीज पर बरसाना में राधा रानी और श्रीकृष्ण का झूलन महोत्सव मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ये वो दिन होता है, जब राधा रानी का अपनी ससुराल नंदगांव से अपने मायके बरसाना में आगमन होता है. राधा रानी के हरियाली तीज पर मायके आने की परंपरा का अनुसरण करते हुए ही नवविवाहित बेटियां मायके आती हैं.

शिव जी ने देवी पार्वती को अपनाया था

सावन में आने वाली हरियाली तीज का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन से माना जाता है. शिवपुराण में इसका उल्लेख विस्तार पूर्वक मिलता है. मान्यता है कि भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने कठोर तप किया था. सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन यानी हरियाली तीज पर महादेव ने माता की तपस्या से प्रसन्न होकर उनको अपनाया था.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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