कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए मेडल की सबसे बड़ी उम्मीदों में से एक नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल हासिल किया. वहीं भारत के ही यशवीर सिंह ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर सबको हैरान कर दिया. इस तरह मेंस जैवलिन थ्रो भारत के लिए दोहरी सफलता लेकर आया. गोल्ड मेडल के दावेदार के रूप में उतरे पूर्व ओलंपिक और कॉमनवेल्थ चैंपियन नीरज चोपड़ा इस बार पहला स्थान हासिल नहीं कर सके. श्रीलंका के युवा थ्रोअर रुमेश थरंगा पथिरागा ने नीरज को मात देते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया.
ग्लासगो गेम्स में भारतीय फैंस को जिस इवेंट का सबसे ज्यादा इंतजार था वो शुक्रवार 31 जुलाई की शाम (भारत में देर रात) शुरू हुआ. पिछली बार चोट के कारण कॉमनवेल्थ गेम्स से बाहर रहने वाले नीरज चोपड़ा से एक बार फिर इस इवेंट का खिताब जीतने की उम्मीद थी. मगर नजरें भारत के ही यशवीर और रोहित यादव पर भी थीं, जो पहली बार इस इवेंट में हिस्सा ले रहे थे. वहीं पाकिस्तान के अरशद नदीम पर भी निगाहें टिकी थीं क्योंकि वो डिफेंडिंग चैंपियन थे और साथ ही मौजूदा ओलंपिक चैंपियन भी हैं.
पहले राउंड के थ्रो में नीरज ने सधी शुरुआत की लेकिन असली कमाल उन्होंने दूसरे थ्रो में किया. उन्होंने सीधे 85.83 मीटर तक भाला फेंका और सीधे नंबर-1 बन गए. गंभीर चोट के बाद लौट रहे नीरज का ये इस सीजन का बेस्ट थ्रो था. मगर वो ज्यादा देर तक इस पोजिशन पर नहीं रहे क्योंकि उसी राउंड में श्रीलंका के पथिरागा ने 89.73 मीटर के जबरदस्त थ्रो के साथ नीरज से पहला स्थान छीन लिया.
इसके बाद अगले 4 राउंड में दोनों में से कोई भी अपने थ्रो में इजाफा नहीं कर सका. वहीं कोई अन्य थ्रोअर भी उनसे आगे नहीं निकल सका. इस तरह पथिरागा ने गोल्ड मेडल जीत लिया, जो CWG में 2006 के बाद श्रीलंका का पहला ही गोल्ड मेडल है. वहीं 2018 के बाद इन गेम्स में लौटे नीरज को सिल्वर से संतोष करना पड़ा.
(खबर अपडेट हो रही है)