संसद से पारित एंटी पेपर लीक बिल अब कानून बन गया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इस कानून को मंजूरी दे दी है. इस नए कानून का मकसद पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली धांधली पर सख्ती से रोक लगाना है. इस कानून के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति पेपर लीक या अनुचित तरीकों का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है, साथ ही 50 लाख रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
वहीं अगर यह अपराध किसी संगठित गिरोह या माफिया के तहत किया जाता है, तो ऐसे मामलों में 7 से 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा एआई की मदद से नकल करना, परीक्षा प्रणाली को हैक करना, ऑनलाइन पेपर भेजना और साइबर फ्रॉड जैसे अपराध भी इस कानून के दायरे में आएंगे.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से पीएम मोदी की मुलाकातदरअसल दोनों सदनों से पास होने के बाद अब यह बिल कानून बनने से बस एक कदम दूर था. इसके लिए राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार था, जो अब मिल चुका है. जिसके बाद एंटी पेपर लीक बिल अब कानून बन चुका है. बता दें कि दोनों सदनों में बिल पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी.
इस बिल में अधिक सख्त सजा का प्रस्ताव है. इस कानून का मकसद ऐसे लोगों, संगठित समूहों और संस्थाओं को अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने और अपराध करने से प्रभावी ढंग से रोकना है, जिससे सार्वजनिक परीक्षाओं की ईमानदारी पर बुरा असर पड़ता है.
बिल में क्या-क्या प्रावधान?इस बिल के प्रावधान के तहत, परीक्षाओं में पेपर लीक या अनुचित तरीकों में शामिल पाए गए लोगों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक जेल जाना पड़ सकता है और उन पर 50 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. संगठित अपराधों के लिए, विधेयक में कम से कम सात साल की सजा और 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रस्ताव है. एआई की मदद से नकल करना, परीक्षा प्रणाली को हैक करना, ऑनलाइन पेपर सेंड करना और साइबर फ्रॉड भी इस कानून के दायरे में आएगा.