'जीवन में कभी नहीं होगी गलती…', जानिए अमित शाह ने क्यों की युवाओं से 'गीता रहस्य' पढ़ने की अपील
TV9 Bharatvarsh August 02, 2026 11:42 AM

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार (1 अगस्त) को पुणे में आयोजित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में शिरकत की. इस दौरान उन्होंने युवाओं से लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की प्रसिद्ध पुस्तक ‘श्रीमद्भागवत गीता रहस्य’ पढ़ने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि ‘श्रीमद्भगवद्गीता रहस्य’ की शिक्षाएं यह सुनिश्चित करेंगी कि वो जीवन में कभी गलतियां न करें.

इस दौरान अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया गया. उन्होंने भगवद गीता की व्याख्या को युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक बताया.

‘गीता को पढ़ें, जीवन में गलती नहीं करेंगे’

समारोह में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘मैं सभी युवाओं से अपील करता हूं कि वो गीता को तिलक महाराज के दृष्टिकोण से पढ़ें. आप अपने जीवन में कभी कोई गलती नहीं करेंगे’. उन्होंने कहा कि लोकमान्य तिलक ने अपनी पुस्तक में यह स्पष्ट किया कि कैसे एक आम नागरिक, छात्र और युवा व्यक्ति रोजमर्रा की जिंदगी में भगवद गीता के सिद्धांतों को आत्मसात कर सकता है.

उन्होंने युवा पीढ़ी से तिलक महाराज की रचनाओं को पढ़ने का आग्रह करते हुए कहा कि तिलक महाराज की रचनाएं कभी अप्रचलित नहीं होंगी, कभी पुरानी नहीं होंगी. उन्होंने कहा कि वो शाश्वत हैं और हमेशा राष्ट्र का मार्गदर्शन करती रहेंगी और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी.

‘तिलक की शिक्षाएं युवाओं को प्रेरित करती हैं’

शाह ने कहा कि तिलक का जीवन और उनकी शिक्षाएं देश के युवाओं को प्रेरित करती रहती हैं और राष्ट्र निर्माण में प्रासंगिक बनी हुई हैं. उन्होंने कहा कि ‘तिलक ने सार्वजनिक गणेश उत्सव के माध्यम से लोगों को एकजुट किया और उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ा. भारत अब लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा निर्धारित सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मार्ग पर दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है और कोई भी इस यात्रा को उलट नहीं सकता’.

‘तिलक के नारे ने स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी’

तिलक को भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख वास्तुकारों में से एक बताते हुए शाह ने कहा कि राष्ट्रवाद, स्वशासन और सामाजिक जागृति पर उनके विचार देश का मार्गदर्शन करते रहते हैं. उन्होंने कहा कि तिलक का अमर नारा, ‘स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा’ ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी और स्वतंत्रता सेनानियों की पीढ़ियों को प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि इस नारे ने लोगों को यह एहसास दिलाया कि स्वशासन उनका अधिकार है, न कि किसी की ओर से कोई एहसान. उन्होंने कहा कि तिलक के राष्ट्रवाद, स्वराज और सामाजिक जागरण के विचार आज भी देश के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं.

अजीत डोभाल के काम की सराहना

समारोह में अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया. उन्होंने कहा कि लोकमान्य तिलक की निर्भीक राष्ट्रवादी सोच और अजीत डोभाल की सुरक्षा नीति में समानता दिखाई देती है. शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में सरकार बनने के बाद सबसे पहले अजीत डोभाल को एनएसए नियुक्त किया और उनके नेतृत्व में भारत की विदेश नीति को मजबूत आधार मिला.

‘विदेश नीति को मिली स्टील जैसी मजबूती’

गृह मंत्री ने कहा कि पहले भारत की विदेश नीति में दृढ़ता की कमी दिखाई देती थी, लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और अजीत डोभाल की रणनीति के कारण देश की विदेश नीति स्टील जैसी मजबूत रीढ़ वाली बन गई है. उन्होंने कहा कि आज दुनिया में भारत का सम्मान और प्रभाव दोनों बढ़े .शाह ने कहा कि लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार जैसे पुरस्कार महज दिखावे के बजाय प्रेरणा के स्रोत के रूप में काम करते हैं.

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