जिस पाकिस्तान ने दशकों तक अपनी धरती पर आतंकवाद की नर्सरी तैयार की, आज वही आतंक की भयंकर आग में पूरी तरह झुलस रहा है. इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP) की ओर से जारी ‘ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026’ की रिपोर्ट ने पाकिस्तान की एक बेहद डरावनी तस्वीर पेश की है. इस इंडेक्स में पाकिस्तान पहली बार दुनिया में नंबर वन पर पहुंच गया है, जो साबित करता है कि वहां सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है.
ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल पाकिस्तान में आतंकवाद से जुड़ी मौतों में 6% का इजाफा हुआ है. 2025 में देश ने 1,139 आतंकी हमले और 1,045 मौतें दर्ज कीं. यह आंकड़ा 2013 के बाद से सबसे खौफनाक है. लगातार छठे साल पाकिस्तान में आतंकी हमलों में होने वाली मौतों का ग्राफ ऊपर की ओर गया है. जनवरी से जुलाई 2026 तक पूरे पाकिस्तान में आतंकवाद और सुरक्षा ऑपरेशनों के कारण कुल 2,786 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें 1,857 आतंकवादी, 434 सुरक्षाकर्मी, 463 आम नागरिक और शांति समितियों के 32 सदस्य शामिल हैं.

बंधक बनाने की घटनाओं में बड़ा उछाल आया है. 2024 में 101 लोगों को बंधक बनाया गया था, जो 2025 में बढ़कर 655 हो गया. इसमें सबसे बड़ी भूमिका ‘जाफर एक्सप्रेस’ पर हुए हमले की रही, जहां एक साथ 442 लोगों को आतंकियों ने बंधक बना लिया था. आज पाकिस्तान उस कतार में खड़ा हो गया है जहां बुर्किना फासो, नाइजीरिया, नाइजर और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो जैसे अशांत अफ्रीकी देश हैं. दुनिया भर में आतंकवाद से होने वाली कुल मौतों का लगभग 70% केवल इन्हीं 5 देशों में हो रहा है.

इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (PICSS) की ताज़ा रिपोर्ट ने हालात को और गंभीर बताया है. PICSS के मुताबिक, जुलाई 2026 इस साल का सबसे घातक महीना साबित हुआ है. इस एक महीने में पूरे पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों और सैन्य ऑपरेशनों के दौरान 606 लोगों की जान गई और 232 लोग घायल हुए.
PICSS के मुताबिक, जुलाई के खौफनाक आंकड़े…
पाकिस्तान का सुरक्षा तंत्र सबसे ज्यादा खैबर पख्तूनख्वा (KPK) और बलूचिस्तान प्रांत में विफल हुआ है. ‘ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स’ के मुताबिक, पिछले साल पाकिस्तान के 74% आतंकी हमले और 67% मौतें इन्हीं दो सूबों में हुईं.
जुलाई 2026 में बलूचिस्तान के हालात सबसे ज्यादा बदतर रहे. यहां कुल मौतों का आंकड़ा जून (109) के मुकाबले 241% बढ़कर 372 हो गया. सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि बलूचिस्तान में सुरक्षाकर्मियों की मौत में 933% का भारी उछाल आया (जून में 6 मौतें, जुलाई में 62 मौतें).
क्यों सुलग रहा है पाकिस्तान?पाकिस्तान की इस दुर्दशा के पीछे दो बड़े कारण हैं. पहला, अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे (2021) के बाद से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे उग्रवादी गुटों को खुली छूट और आधुनिक हथियार मिल गए हैं. दूसरा, पाकिस्तान की राजनीति, न्यायपालिका और सेना के बीच चल रही आंतरिक कलह ने देश के सुरक्षा तंत्र को अंदर से खोखला कर दिया है. पाकिस्तान अब अफगानिस्तान और ईरान से सटे अपने ही बॉर्डर को सुरक्षित करने में नाकाम साबित हो रहा है.
यह भी पढ़ें: US का नया वीजा नियम लागू, 50 देशों पर बॉन्ड की शर्त; भारत को राहत