AIIMS दिल्ली से क्यों छोड़ रहे हैं डॉक्टर, 8 साल में 58 ने दिया इस्तीफा तो 1 साल में 6 ने लिया VRS
TV9 Bharatvarsh August 02, 2026 05:42 PM

देश के सबसे प्रतिष्ठित सरकारी अस्पताल AIIMS दिल्ली से पिछले कुछ सालों में सीनियर डॉक्टरों के इस्तीफे और VRS (स्वैच्छिक रिटायरमेंट) के मामले बढ़े हैं. एक तरफ मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर अनुभवी डॉक्टर संस्थान छोड़ रहे हैं और बड़ी संख्या में फैकल्टी की सीटें खाली हैं. आखिर पिछले 8 साल में 58 डॉक्टर AIIMS से क्यों गए, उन्होंने ऐसा फैसला क्यों लिया और सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए क्या कर रही है? आइए आंकड़ों और सरकारी जानकारी के आधार पर पूरी तस्वीर समझते हैं.

कितने डॉक्टरों ने AIIMS छोड़ा?

संसद में दिए गए सरकारी जवाब के मुताबिक 31 जुलाई 2025 को लोकसभा में सांसद गिरधारी यादव और दिनेश चंद्र यादव के सवाल के जवाब में स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि साल 2025 में AIIMS दिल्ली के 6 डॉक्टरों ने पर्सनल रीजन बताकर VRS लिया. मंत्री ने यह भी कहा कि देशभर के AIIMS में इस्तीफे, VRS और खाली पदों पर नई भर्ती करना एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है. लेकिन यह सिर्फ एक साल की तस्वीर है. ThePrint की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2018 से जुलाई 2025 के बीच AIIMS दिल्ली के 58 फैकल्टी डॉक्टर असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और एडिशनल प्रोफेसर संस्थान छोड़ चुके हैं. इनमें 11 डॉक्टर दूसरे AIIMS में चले गए, 10 IHBAS और PGI चंडीगढ़ जैसे दूसरे सरकारी संस्थानों में गए, जबकि बाकी ने पर्सनल रीजन बताकर इस्तीफा दिया.

संसद में इसी सवाल के जवाब में नए AIIMS की प्रोग्रेस की भी जानकारी दी गई. हरियाणा के रेवाड़ी और जम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा AIIMS का निर्माण करीब 65% और 78% पूरा हो चुका है. इन्हें दिसंबर 2026 तक शुरू करने का टारगेट है. वहीं दरभंगा AIIMS पर शुरुआती काम चल रहा है और इसे जुलाई 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. बेंगलुरु में नए AIIMS को अभी मंजूरी नहीं मिली है.

किन डॉक्टरों ने AIIMS छोड़ा?

बीते 8 सालों में कई बड़े विभागों के HOD के इस्तीफे चर्चा में रहे. ऑर्थोपेडिक्स के HOD डॉ. राजेश मल्होत्रा ने जून 2023 में 31 साल की सेवा के बाद AIIMS छोड़ा. न्यूरोलॉजी की HOD डॉ. एम.वी. पद्मा ने अक्टूबर 2023 में 30 साल बाद इस्तीफा दिया. सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के HOD डॉ. एस.वी.एस. देव ने फरवरी 2024 में करीब 29 साल बाद संस्थान छोड़ा. कार्डियोलॉजी के HOD डॉ. बलराम भार्गव ने अप्रैल 2024 में 31 साल से ज्यादा सेवा के बाद इस्तीफा दिया. CTVS विभाग के HOD डॉ. शिव कुमार चौधरी ने 2024 में 27 साल की सेवा के बाद VRS लिया.

डॉक्टरों ने AIIMS क्यों छोड़ा?

ThePrint ने मौजूदा और पूर्व डॉक्टरों से बातचीत के आधार पर पांच बड़ी वजहें बताई हैं.

  • पहली वजह है खरीद प्रक्रिया, फाइलों और टेंडर में लगने वाला लंबा पेपरवर्क, जिससे मरीजों और रिसर्च के लिए समय कम बचता है.
  • दूसरी वजह है प्रमोशन के सीमित मौके. HOD या डायरेक्टर जैसे बड़े पद बहुत कम हैं, इसलिए कई डॉक्टरों को लगता है कि उनका करियर आगे नहीं बढ़ रहा.
  • तीसरी वजह है लीडरशिप और अंदरूनी पॉलिटिक्स. 2022 में अपेक्षाकृत कम सीनियर डॉक्टर को डायरेक्टर बनाए जाने के बाद कई सीनियर डॉक्टरों में नाराजगी रही.
  • चौथी वजह है प्राइवेट अस्पतालों का आकर्षण, जहां बेहतर सैलरी, आधुनिक सुविधाएं, कम एडमिनिस्ट्रेटिव दबाव और ज्यादा प्रोफेशनल आजादी मिलती है.
  • पांचवीं वजह है सैलरी और रहने की दिक्कत. दिल्ली जैसे महंगे शहर में AIIMS के 850 से ज्यादा फैकल्टी में से सिर्फ करीब 250 को ही कैंपस में रहने के लिए घर मिल पाया है.
  • भर्ती कितनी हुई, कितनी सीटें खाली हैं?

    मार्च 2026 की संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट के मुताबिक AIIMS दिल्ली में 1,306 मंजूर फैकल्टी पदों में से 452 यानी करीब 35% सीटें खाली थीं. इसके बाद 24 जुलाई 2026 को लोकसभा में दिए गए नए आंकड़ों के मुताबिक 2026-27 में 1,313 मंजूर फैकल्टी पदों में से सिर्फ 877 भरे हुए हैं. यानी 436 फैकल्टी पद अभी भी खाली हैं. नर्सिंग, टेक्निकल और दूसरे स्टाफ की स्थिति भी गंभीर है. 13,913 मंजूर पदों में से 2,461 खाली हैं. यानी अकेले AIIMS दिल्ली में कुल 2,897 पद खाली हैं, जो देश के किसी भी दूसरे AIIMS से ज्यादा हैं. देश के 20 AIIMS को मिलाकर कुल 17,340 पद खाली हैं. इनमें 2,181 फैकल्टी और 15,159 गैर-फैकल्टी पद शामिल हैं.

    इन खाली पदों को भरने के लिए सरकार ने स्टैंडिंग सेलेक्शन कमेटी बनाई है. नए AIIMS में 70 साल तक के रिटायर्ड फैकल्टी को कॉन्ट्रैक्ट पर रखने की सुविधा दी गई है. विजिटिंग फैकल्टी स्कीम शुरू की गई है और NORCET, CRE और INI-CET जैसी परीक्षाओं के जरिए नर्सिंग और दूसरे स्टाफ की भर्ती की जा रही है. कुछ सुधार भी दिखा है. AIIMS दिल्ली में गैर-फैकल्टी के खाली पद 2024-25 के 2,550 से घटकर 2026-27 में 2,461 रह गए हैं, लेकिन नई मंजूर सीटों के मुकाबले भर्ती की रफ्तार अभी भी धीमी है.

    AIIMS में कितने मरीज आते हैं?

    खाली पदों का असर मरीजों की देखभाल पर भी दिख रहा है. साल 2024-25 में AIIMS दिल्ली की OPD में करीब 48.4 लाख मरीज इलाज के लिए पहुंचे, जबकि करीब 3.61 लाख मरीज भर्ती हुए. पिछले दो साल में OPD मरीजों की संख्या करीब 14% और भर्ती मरीजों की संख्या करीब 29% बढ़ी है. भारी भीड़ को देखते हुए AIIMS ने रातभर इंतजार करने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए CRPF की मदद से आश्रय सुविधा शुरू की है. यहां करीब 250 लोगों के ठहरने की व्यवस्था है, लेकिन यह लगभग हमेशा भरी रहती है.

    कुल मिलाकर तस्वीर साफ है. AIIMS में हर साल मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन डॉक्टरों और स्टाफ की भर्ती उसी रफ्तार से नहीं हो पा रही. यही वजह है कि संसदीय समिति ने समय पर भर्ती करने और अनुभवी डॉक्टरों को AIIMS में बनाए रखने के लिए रिटेंशन इंसेंटिव यानी अतिरिक्त प्रोत्साहन देने की सिफारिश की है, ताकि आने वाले समय में मरीजों को बेहतर इलाज मिलता रहे.

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