यूरोप में बेहतर जिंदगी, अच्छी नौकरी और सुरक्षित भविष्य का सपना लेकर हजारों लोग हर साल अपनी जान जोखिम में डालते हैं. स्पेन के उत्तरी अफ्रीका स्थित शहर सेउटा में 31 जुलाई को हजारों लोग समुद्र तैरकर और सीमा पार कर स्पेन पहुंचे, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उनमें से करीब 48,300 लोग वापस मोरक्को लौट गए. स्पेन के गृह मंत्रालय के मुताबिक, गुरुवार और शुक्रवार के बीच करीब 50,000 से 60,000 प्रवासी मोरक्को से स्पेन के सेउटा में दाखिल हुए. यह यूरोप के हाल के इतिहास की सबसे बड़ी सीमा पार घटनाओं में से एक मानी जा रही है. इस दौरान समुद्र में डूबने और भगदड़ जैसी घटनाओं में कम से कम 67 लोगों की मौत हो गई. सबसे बड़ा सवाल यही है कि जो लोग जान जोखिम में डालकर यूरोप पहुंचे, उन्होंने वापस लौटने का फैसला क्यों किया?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इसके पीछे कई वजहें थींसेउटा स्पेन का एक छोटा शहर है, लेकिन यह अफ्रीका महाद्वीप में मोरक्को की सीमा से लगा हुआ है. यह यूरोपीय संघ की उन गिनी-चुनी जगहों में है जहां अफ्रीका और यूरोप की जमीनी सीमा मिलती है. इसी वजह से अफ्रीका के लोग इसे यूरोप में प्रवेश का सबसे आसान रास्ता मानते हैं.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में एक साथ सीमा पार होना सिर्फ आर्थिक मजबूरी का नतीजा नहीं हो सकता. कई विश्लेषकों का कहना है कि स्पेन और मोरक्को के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव और सीमा प्रबंधन भी इस संकट की एक बड़ी वजह हो सकते हैं. कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि मोरक्को ने सीमा पर निगरानी ढीली छोड़ी, जिससे इतनी बड़ी भीड़ एक साथ सेउटा पहुंच गई. हालांकि मोरक्को ने इस पर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है.
अब आगे क्या होगा?स्पेन ने सेउटा सीमा पर सुरक्षा और बढ़ा दी है. समुद्री रास्ते पर फ्लोटिंग बैरियर लगाने का काम शुरू हो गया है ताकि भविष्य में इस तरह की घुसपैठ रोकी जा सके. यूरोपीय संघ ने भी इस संकट पर आपात बैठक बुलाने का फैसला किया है. यह घटना सिर्फ अवैध प्रवासन की कहानी नहीं है. यह उन हजारों युवाओं की कहानी भी है जो बेहतर जिंदगी की तलाश में सब कुछ दांव पर लगा देते हैं, लेकिन भूख, बंद सीमाओं और कठोर हकीकत के सामने उनका ‘यूरोप का सपना’ कुछ ही घंटों में टूट जाता है.
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