सत्य निकेतन हादसे पर शशि थरूर नाराज, पूछा- छात्रों की मौत का जिम्मेदार कौन?
आशुतोष प्रताप सिंह September 07, 2026 07:42 PM

दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में छात्रों के लिए पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही बहुमंजिला इमारत के ढहने की घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई है. हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान सोमवार को दूसरे दिन भी जारी रहा. अब तक मलबे से कुल 11 लोगों को बाहर निकाला गया है. घटना को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने हादसे को ‘शॉकिंग’ और ‘ट्रेजिक’ बताते हुए दिल्ली में छात्रों के लिए सरकारी छात्रावासों की कमी और किराए के मकानों, पीजी और हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया है.

शशि थरूर ने छात्रों की मौत पर उठाया सवाल

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सत्य निकेतन हादसे से जुड़ी खबर साझा करते हुए इसे बेहद चौंकाने वाली और दुखद घटना बताया. उन्होंने लिखा कि यह ऐसी इमारत के ढहने की घटना है, जिसमें मुख्य रूप से छात्र रहते थे.
थरूर ने अपने ट्वीट में सवाल उठाते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा ईश्वरीय होती है, लेकिन जब सरकारी छात्रावासों के अभाव में देश की राजधानी, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में छात्र किराए के घरों, पीजी या हॉस्टल में रहते हैं और ऐसी इमारतों के गिरने से उनकी असामयिक मौत होती है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? उन्होंने हादसे के संदर्भ में इमारत की सुरक्षा व्यवस्था और कथित लापरवाही को लेकर भी सवाल उठाया.

मलबे से निकाले गए 11 लोग, छह की मौत

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की ओर से जारी बयान के मुताबिक, सत्य निकेतन में इमारत ढहने के बाद 11 लोगों को जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर लाया गया. एम्स ने बताया कि इन 11 लोगों में पांच को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था, जबकि गंभीर हालत में लाए गए एक अन्य व्यक्ति ने बाद में दम तोड़ दिया. इस तरह हादसे में मरने वालों की संख्या छह हो गई है. अस्पताल में तीन लोगों को भर्ती किया गया है और उनका इलाज जारी है. वहीं, एक व्यक्ति के एक अंग का ऑपरेशन किया गया है. मामूली रूप से घायल एक अन्य व्यक्ति को निगरानी में रखने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.

लड़कों के पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी इमारत

यह बहुमंजिला इमारत दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के पास सत्य निकेतन इलाके में स्थित थी. बताया गया है कि इमारत का इस्तेमाल लड़कों के पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास के रूप में किया जा रहा था. हादसे के समय इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था. इसी दौरान रविवार दोपहर करीब डेढ़ बजे अचानक पूरी इमारत ढह गई. पेइंग गेस्ट यानी ऐसा व्यक्ति जो किसी मकान या आवास में किराया देकर रहता है, जहां अक्सर भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं.

रातभर कई एजेंसियों ने चलाया राहत अभियान

हादसे के बाद दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) समेत कई एजेंसियां राहत और बचाव अभियान में जुट गईं. रविवार रात से सोमवार तक लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश की गई. अभियान के दौरान एक और व्यक्ति को मलबे से बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी.

पुलिस ने मालिक समेत अन्य लोगों पर दर्ज किया मामला

पुलिस उपायुक्त (दक्षिण-पश्चिम) अमित गोयल ने बताया कि रात में एक और व्यक्ति को मलबे से निकाला गया था, लेकिन उसकी मौत हो गई. इसके बाद हादसे में मृतकों की संख्या छह हो गई. उन्होंने कहा कि घटना से कथित तौर पर जुड़े लोगों की तलाश जारी है. पुलिस ने इमारत के मालिक और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

मजिस्ट्रेट जांच के आदेश

हादसे की गंभीरता को देखते हुए घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश भी दिए गए हैं. जांच में इमारत के ढहने के कारणों, निर्माण और मरम्मत कार्य के दौरान अपनाए गए सुरक्षा मानकों तथा कथित लापरवाही समेत अन्य पहलुओं की जांच की जाएगी. सत्य निकेतन में हुई इस घटना ने राजधानी में पीजी और किराए के मकानों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीं, शशि थरूर के सवालों के बाद सरकारी छात्रावासों की उपलब्धता और निजी पीजी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है.

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