कृष्ण छठी की रात खाली कागज और कलम क्यों रखते हैं? कम लोग जानते हैं वजह
Hirdesh Kumar Singh September 08, 2026 01:42 PM

Krishna Chhathi 2026: जन्माष्टमी के बाद भगवान कृष्ण की छठी मनाने की तैयारी शुरू हो जाती है. इस दिन भक्त लड्डू गोपाल को स्नान कराते हैं, नए वस्त्र पहनाते हैं और कढ़ी-चावल सहित कई पकवानों का भोग लगाते हैं.

कान्हा की छठी से जुड़ी एक परंपरा ऐसी भी है, जिसमें रात के समय पूजा स्थान के पास खाली कागज और कलम रखी जाती है. आखिर इन दोनों चीजों का भगवान कृष्ण की छठी से क्या संबंध है और कागज पर कुछ लिखा जाता है या उसे खाली ही छोड़ना चाहिए?

छठी की रात भाग्य लिखे जाने की मान्यता

भारतीय लोकपरंपरा में बच्चे के जन्म का छठा दिन विशेष माना जाता है. मान्यता है कि इस रात षष्ठी माता या विधाता माता अदृश्य रूप से आकर नवजात शिशु का भाग्य लिखती हैं. इसी विश्वास के कारण कई क्षेत्रों में शिशु की छठी पर पूजा स्थान के पास कलम, दवात और कोरा कागज रखा जाता है.

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भगवान कृष्ण के जन्म को भी सामान्य बालक के जन्मोत्सव की तरह प्रेम और वात्सल्य के साथ मनाया जाता है. जन्माष्टमी पर उनके जन्म के बाद छठे दिन भक्त कान्हा की छठी करते हैं. इसी अवसर पर नवजात की छठी वाली परंपराओं को लड्डू गोपाल की सेवा में शामिल किया जाता है. खाली कागज और कलम रखना भी इसी लोकविश्वास का हिस्सा है.

कागज खाली क्यों छोड़ा जाता है?

पूजा में रखा कागज भक्त स्वयं भरने के लिए नहीं, बल्कि विधाता के प्रतीकात्मक स्वागत के लिए खाली छोड़ते हैं. मान्यता है कि शिशु का भविष्य मनुष्य नहीं, ईश्वर और उसके कर्म निर्धारित करते हैं. कोरा कागज उस भविष्य का प्रतीक माना जाता है, जो अभी लिखा जाना बाकी है.

इसलिए कुछ परिवारों में कागज पर पहले से कुछ नहीं लिखा जाता. उसे कलम के साथ लड्डू गोपाल के पास रखकर दीपक जलाया जाता है. परिवार कान्हा के सुख, मंगल और कल्याण की प्रार्थना करता है. हालांकि कई क्षेत्रों में कागज पर 'श्रीकृष्ण', 'श्रीहरि' या स्वस्तिक बनाने की परंपरा भी है. दोनों विधियां लोकाचार पर आधारित हैं और परिवार के अनुसार बदल सकती हैं.

क्या यह शास्त्रों में अनिवार्य नियम है?

कृष्ण छठी पर कागज और कलम रखना कोई सर्वमान्य या अनिवार्य शास्त्रीय नियम नहीं है. यह मुख्यतः नवजात की छठी और षष्ठी माता की पूजा से जुड़ी लोकपरंपरा है. भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में छठी मनाने का तरीका अलग मिलता है. कहीं कलम-दवात रखी जाती है, कहीं चौक बनाकर छठी माता की पूजा होती है और कहीं केवल लड्डू गोपाल का अभिषेक, श्रृंगार और भोग लगाया जाता है.

इसलिए किसी घर में कागज-कलम रखने की परंपरा न हो तो केवल इसके कारण पूजा अधूरी नहीं मानी जाएगी. कृष्ण छठी का मुख्य भाव भगवान के बाल स्वरूप की सेवा, उत्सव और उनके प्रति वात्सल्य प्रकट करना है.

कागज और कलम कहां रखें?

जो भक्त यह परंपरा निभाना चाहते हैं, वे पूजा स्थान को साफ करने के बाद लड्डू गोपाल के पास एक साफ कोरा कागज और नई अथवा स्वच्छ कलम रख सकते हैं. इन्हें भगवान के चरणों पर रखने के बजाय पास में किसी साफ चौकी या थाली में रखना उचित रहेगा.

साथ में दीपक जलाया जा सकता है, लेकिन रातभर दीपक जलता छोड़ना सुरक्षित नहीं है. पूजा पूरी होने के बाद दीपक बुझ जाए तो इससे पूजा में कोई दोष नहीं माना जाना चाहिए. घर की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है.

अगले दिन कागज का क्या करें?

छठी की पूजा के बाद कागज को कूड़े में न फेंकें. यदि वह बिल्कुल खाली है तो उसे पूजा की किताब में सुरक्षित रखा जा सकता है. उस पर भगवान का नाम या स्वस्तिक बनाया गया हो तो उसे पूजा स्थान में रखें. कुछ परिवार अगले दिन उसी कागज पर बच्चे या लड्डू गोपाल का नाम लिखते हैं.

इसे धन रखने की जगह रखने या इससे निश्चित रूप से भाग्य बदलने का दावा शास्त्रीय नियम नहीं है. यह कागज श्रद्धा और शुभ संकल्प का प्रतीक है, कोई चमत्कारी वस्तु नहीं.

कृष्ण छठी का संदेश

छठी की रात रखा गया खाली कागज इस विश्वास का प्रतीक है कि जीवन की कहानी अभी लिखी जानी है. भगवान कृष्ण की छठी पर भक्त उनके बाल स्वरूप की पूजा करते हुए अपने घर और परिवार के लिए मंगल की कामना करते हैं. पूजा में कागज-कलम रखें या न रखें, सबसे महत्वपूर्ण भाव श्रद्धा, प्रेम और सात्विकता का है.

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