Haritalika Teej 2026: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि यानी हरितालिका तीज का पावन पर्व 14 सितंबर को पूरे विधि-विधान से मनाया जा रहा है. पूर्वांचल समेत पूरे उत्तर भारत में इस पर्व को लेकर महिलाओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है.
पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाने वाला यह व्रत हिंदू धर्म के सबसे कठिन व्रतों में गिना जाता है.
बाजारों में रौनक, 16 श्रृंगार और पूजन सामग्री की खूब खरीदारी
त्योहार से ठीक एक दिन पहले धर्मनगरी काशी की गलियां और बाजार पूरी तरह गुलजार नजर आए. दशाश्वमेध, गोदौलिया और चौक के बाजारों में सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार की चीजें, चुनरी, चूड़ियां और पूजा के लिए मिट्टी के शिवलिंग बनाने वाली सामग्री खरीदती दिखीं. मेंहदी लगवाने के लिए दुकानों पर महिलाओं की लंबी कतारें लगी रहीं.
24 घंटे का निर्जला उपवास, सूर्योदय के बाद ही खुलेगा पारण
हरितालिका तीज का व्रत बेहद कड़े नियमों के साथ रखा जाता है. व्रती महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त से अगले दिन के सूर्योदय तक अन्न तो दूर, जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करती हैं. रात भर जागरण कर भगवान शिव और माता पार्वती की बालू अथवा काली मिट्टी की प्रतिमा बनाकर विधिवत पूजन किया जाता है. अगले दिन सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण करने की परंपरा है.
हरितालिका तीज 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष हरितालिका तीज की मुख्य पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह के समय रहेगा:
पंडितों और आचार्यों के अनुसार, सुबह के इस शुभ काल में गौरी-शंकर की विधिवत पूजा और व्रत कथा का श्रवण करना अखंड सौभाग्य प्रदान करने वाला माना गया है.
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