महाकुंभ 2025 के दौरान रेलवे व्यवस्था की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। महाकुंभ में स्नान के लिए लाखों लोग प्रयागराज पहुंचते हैं, जिसके कारण हर बार रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में भारी भीड़ देखने को मिलती है। इस बार भी स्थिति कुछ अलग नहीं दिख रही है। महाकुंभ के दौरान रेल से यात्रा करना किसी चुनौती से कम नहीं है।
इसका ताजा उदाहरण कटिहार जंक्शन से सीमांचल एक्सप्रेस की तस्वीर है, जिसमें यात्री ट्रेन के शौचालय में बैठकर यात्रा करते नजर आए। यह दृश्य न केवल खराब प्रबंधन की ओर इशारा करता है, बल्कि रेलवे सुरक्षा और सुविधाओं के अंत की ओर भी इशारा करता है। यात्रा के दौरान यात्रियों के लिए भारी भीड़, जगह की कमी और सुविधाओं का अभाव एक बड़ी समस्या बन गई है।
कोई ठोस उपाय नहीं, स्थिति और गंभीर
महाकुंभ के दौरान यात्री किसी भी कीमत पर अपने गंतव्य तक पहुंचना चाहते हैं, लेकिन भारी भीड़ के कारण उन्हें काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। आपातकालीन खिड़कियों का उपयोग मुख्य दरवाजे के रूप में भी किया जा रहा है। इससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है, जहां रेलवे प्रशासन को यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा का ध्यान रखना चाहिए था, वहीं अब तक कोई ठोस कदम उठाते नहीं दिख रहे हैं।
भीड़ इतनी अधिक है कि अपनी सीट तक पहुंचना मुश्किल है।
रेलवे स्टेशन पर भीड़भाड़ के कारण यात्री बिना किसी असुविधा के अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाते हैं। लोगों को रेलगाड़ी तक पहुंचने के लिए भी लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। इसके अलावा अनियंत्रित भीड़ के कारण यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने-उतरने में असुविधा हो रही है और कुछ लोग घायल भी हो रहे हैं।
रेलवे प्रशासन को इस स्थिति से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। इस समय यात्री न केवल अपनी आस्था के लिए यात्रा कर रहे हैं, बल्कि उन्हें अपनी कठिनाइयों पर भी काबू पाना है। रेलवे को अब ट्रेनों में उचित व्यवस्था, सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करके यात्रियों को आरामदायक यात्रा प्रदान करने के लिए बेहतर व्यवस्था करने की आवश्यकता है।