अजमेर न्यूज़ डेस्क - राजस्थान के अजमेर में स्थित प्राचीन मराठाकालीन कोटेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यह मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक पूजा करने से सभी की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मंदिर के पुजारी विनोद कुमार शर्मा बताते हैं कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता शिवरात्रि के दिन इस मंदिर में पूजा-अर्चना किया करते थे।
पुजारी आगे बताते हैं कि अपनी प्रसिद्धि और चमत्कारों के कारण यह मंदिर अजमेर के साथ-साथ आस-पास के गांवों और शहरों में भी काफी प्रसिद्ध है। मंदिर की एक और विशेषता यह है कि शिवलिंग पर चढ़ाया जाने वाला जल पहाड़ों से होते हुए कुएं में जाता है। इससे पानी बर्बाद होने से बच जाता है और इसे रिसाइकिल करके दोबारा इस्तेमाल में लाया जाता है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यह मंदिर अजमेर के हाथी खेड़ा गांव में स्थित है।
मंदिर के आसपास का शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है। यहां नियमित रूप से धार्मिक अनुष्ठान और उत्सव आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। शिवरात्रि के दौरान सुबह 3 बजे से ही यहां भक्तों का आना शुरू हो जाता है। इस दिन मंदिर में कई कार्यक्रम और विशेष पूजा-अर्चना होती है। मान्यता है कि मंदिर में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से सुख-समृद्धि आती है।
भक्तों के दुख दूर करते हैं बाबा
भक्त मोहित मल्होत्रा ने बताया कि इस मंदिर से गहरी आस्था जुड़ी है। वह हर रोज अपने परिवार के साथ मंदिर में भगवान भोलेनाथ बाबा के दर्शन करने और मत्था टेकने आते हैं। यहां आकर उन्हें एक अजीब सी शांति का एहसास होता है। बाबा के आशीर्वाद से पूरा परिवार खुश है और सभी काम भी पूरे हो रहे हैं। भक्त सोनू अग्रवाल ने बताया कि बाबा के दर पर आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।