भारत सरकार ने 1 अप्रैल से डिजिटल विज्ञापन पर लगाए गए 6% कर (जिसे आमतौर पर “गूगल टैक्स” कहा जाता है) को समाप्त करने का निर्णय लिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस फैसले की घोषणा की, जो अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव को कम करने और संभावित प्रतिशोधी टैरिफ से बचने की रणनीति का हिस्सा है। यह टैक्स मुख्य रूप से गूगल, मेटा और अमेजन जैसी अमेरिकी टेक कंपनियों पर लागू होता था, जिसे अमेरिका ने “अनुचित” करार दिया था।
अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते की दिशा में बड़ा कदम
पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने 2025 के अंत तक एक व्यापार समझौते पर काम करने और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया था। इस टैक्स को हटाना इस लक्ष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस समय अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल भारत में इस विषय पर चर्चा के लिए मौजूद है, जिससे इस नीति परिवर्तन का कूटनीतिक महत्व स्पष्ट होता है।
6% टैक्स हटाने का असर
वित्त मंत्रालय ने इसे वित्त विधेयक में किए गए 59 संशोधनों का हिस्सा बताया है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब अमेरिका 2 अप्रैल से उन देशों पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा था, जिन्होंने उसकी टेक कंपनियों पर डिजिटल टैक्स लगाया था।
यह टैक्स पहली बार 2016 में लागू हुआ था और 2020 में इसका दायरा बढ़ाया गया था। इसका उद्देश्य उन बड़ी विदेशी डिजिटल कंपनियों से राजस्व प्राप्त करना था, जो भारत में शारीरिक उपस्थिति के बिना ही भारी मुनाफा कमा रही थीं। मौजूदा वित्त वर्ष में इस टैक्स से सरकार को करीब 3,343 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी।
अमेरिका की आपत्ति और भारत सरकार का रुख
अमेरिका ने इस टैक्स को “भेदभावपूर्ण और अनुचित” बताया था, क्योंकि यह भारतीय कंपनियों पर लागू नहीं होता था। अब इस संशोधन के तहत सरकार डिजिटल कंपनियों को दी जाने वाली कुछ आयकर छूट भी समाप्त करने की योजना बना रही है। यह निर्णय पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और भारत के बीच कर संबंधी तनावों के मद्देनजर लिया गया है।
बाइडेन और ट्रंप प्रशासन दोनों ही इस टैक्स का विरोध कर चुके थे और इसके जवाब में व्यापार प्रतिबंध लगाने की धमकी दी गई थी।
कूटनीतिक रणनीति और आर्थिक प्रभाव
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस टैक्स को हटाना भारत की एक कूटनीतिक चाल है, जिससे अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को और मजबूत किया जा सके। भारत इस कदम से संभावित आर्थिक झटकों से बचने के साथ-साथ यह भी दिखाना चाहता है कि वह व्यापारिक विवादों को कूटनीतिक तरीके से हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस फैसले से भारतीय टेक इंडस्ट्री और डिजिटल विज्ञापन बाजार पर भी प्रभाव पड़ेगा। साथ ही, यह अमेरिका के साथ आर्थिक संबंधों को और बेहतर करने में सहायक साबित हो सकता है।
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