बाबा रामदेव की आयुर्वेदिक पतंजलि प्रोडक्ट्स से होने वाली कमाई के बारे में तो सभी जानते हैं, लेकिन वह अपनी कमाई का क्या करते हैं, यह बहुत से लोगों को नहीं पता। वर्तमान में एलोपैथी और आयुर्वेद के बीच चल रहे विवाद ने काफी ध्यान आकर्षित किया है।
बाबा रामदेव ने एक इंटरव्यू में बताया कि हजारों डॉक्टर तुलसी और गिलोय का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रुचि सोया और पतंजलि का टर्नओवर लगभग 25,000 करोड़ रुपये है, और उनकी कमाई का 100% चैरिटी के लिए जाता है। मार्च 2016 में समाप्त वित्त वर्ष में कंपनी का राजस्व 4,800 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 139% अधिक था।
पतंजलि ने दिवालिया रुचि सोया कंपनी को 4,350 करोड़ रुपये में खरीदा। इसके लिए पतंजलि ने 3,200 करोड़ रुपये का कर्ज लिया, जिसमें विभिन्न बैंकों से वित्तीय सहायता प्राप्त की गई। रुचि सोया भारत में सोया उत्पादन के प्रमुख निर्माताओं में से एक है।
पतंजलि की स्थापना 1995 में हुई थी, जब बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने महज 13,000 रुपये में कंपनी का रजिस्ट्रेशन करवाया। बाबा रामदेव ने बताया कि उस समय उनके पास केवल 3,500 रुपये थे। 2002 में, बाबा रामदेव ने दिव्य योग ट्रस्ट का चेहरा बनकर योग शिविरों का आयोजन शुरू किया।
बाबा रामदेव के योग शिविरों में पहले केवल 250 लोग आते थे, लेकिन उनकी लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही यह संख्या भी बढ़ने लगी। उन्होंने पहली बार 50,000 रुपये का दान प्राप्त कर आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का कारोबार शुरू किया। 1995 में पहला दिव्य योग ट्रस्ट स्थापित किया गया, जिसके बाद कई अन्य ट्रस्ट भी बने।