रिश्तों की नींव प्यार, भरोसे और आपसी सम्मान पर टिकी होती है। लेकिन कभी-कभी कुछ व्यवहार इस नींव को कमजोर कर देते हैं। ऐसा ही एक व्यवहार है गैसलाइटिंग, जो एक मानसिक और भावनात्मक शोषण का रूप है। यह व्यवहार धीरे-धीरे व्यक्ति की सोच, भावनाओं और आत्मविश्वास को प्रभावित करता है, जिससे वह खुद पर शक करने लगता है।
यह शब्द 1944 की एक फिल्म Gaslight से आया है, जिसमें एक पति अपनी पत्नी को मानसिक रूप से भ्रमित करने की कोशिश करता है ताकि वह खुद पर विश्वास खो दे।
गैसलाइटिंग क्या है?गैसलाइटिंग एक ऐसा तरीका है जिसमें कोई व्यक्ति अपने पार्टनर या करीबी को यह महसूस कराता है कि उनकी यादें, सोच या अनुभव गलत हैं। यह कई बार जानबूझकर किया जाता है, तो कभी अनजाने में भी। उदाहरण के लिए, अगर आप किसी से कहते हैं, “तुमने कल मुझसे ऐसा कहा था,” और सामने वाला जवाब देता है, “मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा, तुम्हें भ्रम हो रहा है,” जबकि आपको पूरी तरह याद हो कि बात हुई थी – तो यह गैसलाइटिंग हो सकती है।
इसमें शामिल हो सकते हैं:
बार-बार इनकार करना
बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना
आपको “बहुत संवेदनशील” या “पागल” कहना
आपकी भावनाओं को छोटा या गलत ठहराना
इसका मकसद व्यक्ति को खुद पर संदेह करने पर मजबूर करना होता है, ताकि उसे आसानी से नियंत्रित किया जा सके।
गैसलाइटिंग के संकेतआप बार-बार अपनी यादों या फैसलों पर शक करने लगते हैं।
आप अपने पार्टनर के सामने अपनी बात रखने में झिझक महसूस करते हैं।
आपको लगता है कि आप हमेशा गलत हैं और माफी मांगते रहते हैं।
आपकी भावनाओं को नज़रअंदाज़ किया जाता है या उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है।
गैसलाइटिंग किसी भी रिश्ते के लिए बेहद नुकसानदेह होता है। यह न केवल आत्मविश्वास को कमजोर करता है, बल्कि व्यक्ति को मानसिक रूप से थका और असहाय महसूस कराता है। लंबे समय तक ऐसा व्यवहार झेलने से व्यक्ति में एंग्जायटी, डिप्रेशन और आत्मसम्मान की कमी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
रिश्ते में जब बराबरी खत्म हो जाती है और एक व्यक्ति का नियंत्रण दूसरे पर हावी हो जाता है, तो यह रिश्ता एकतरफा और अस्वस्थ हो जाता है। भले ही ऐसा व्यवहार किसी व्यक्ति द्वारा अनजाने में किया जाए, इसका प्रभाव हमेशा नकारात्मक ही होता है।
क्या गैसलाइटिंग कभी सही हो सकता है?नहीं। गैसलाइटिंग किसी भी परिस्थिति में ठीक नहीं होता। यह एक अनहेल्दी और हानिकारक व्यवहार है, जो रिश्तों को कमजोर करता है। यदि आपको लगे कि आपके साथ ऐसा हो रहा है, तो चुप न रहें। इस पर खुलकर बात करें, भरोसेमंद लोगों से सलाह लें और ज़रूरत हो तो किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लें।
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