दोस्तो बच्चे एक मिट्टी के कच्चे घड़े की तरह होते हैं, जिनको जैसा ढाला जाता हैं वो वैसा ही बन जाते हैं, बच्चे अपने आस पास की चीजों को तुरंत अपनातें हैं, जितना हम अक्सर सोचते हैं। हम उनसे जिस तरह बात करते हैं, उसका उनकी इमोशनल और मेंटल हेल्थ पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है। इसलिए हमें एक माता पिता के तौर पर कुछ बातें उनके सामने नहीं बोलना चाहिए-
बड़ों के झगड़ों का असर उन पर न पड़ने दें
अपने पर्सनल रिश्तों में कड़वाहट या तनाव को अपने बच्चों पर न पड़ने दें। उन्हें सेफ़ और सिक्योर महसूस करना चाहिए।
अपने ट्रॉमा का बोझ उन पर न डालें
बच्चे बड़ों के ट्रॉमा को संभालने के लिए तैयार नहीं होते हैं। पर्सनल मुश्किलों को डिटेल में शेयर करने से वे घबरा सकते हैं और उनके इमोशनल डेवलपमेंट पर असर पड़ सकता है।
बड़ों के रिश्तों से जुड़ी दिक्कतों को प्राइवेट रखें
शादीशुदा या पार्टनर की दिक्कतों पर बात करते समय आपके बच्चों को कभी भी शामिल नहीं करना चाहिए। उन्हें बड़ों के झगड़ों को सुलझाने की ज़िम्मेदारी महसूस नहीं करनी चाहिए।
फाइनेंशियल मामलों पर बात करने से बचें
फाइनेंशियल स्ट्रेस और चुनौतियाँ बड़ों की ज़िम्मेदारियाँ हैं। इन चिंताओं को अपने बच्चों के साथ शेयर करने से बेवजह की चिंता या डर हो सकता है।