वाराणसी में अर्बन पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए रोपवे परियोजना की प्रगति जारी है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद वाराणसी दुनिया का तीसरा ऐसा शहर बन जाएगा, जहां पर्यटक और स्थानीय यात्री रोपवे के माध्यम से शहर के बीच सफर कर सकेंगे। इस सूची में पहले पहले बोलिविया की लापाज़ और मेक्सिको शामिल हैं।
रोपवे परियोजना कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक 3.85 किलोमीटर दूरी तय करेगी। मार्ग में पांच स्टेशन होंगे — कैंट रेलवे स्टेशन, काशी विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरजाघर और गोदौलिया। रोपवे के माध्यम से यह दूरी लगभग 16 मिनट में पूरी होगी। परियोजना में कुल 148 ट्रॉली कारें या गोंडोला शामिल होंगी, जिनमें से प्रत्येक में 10 यात्री बैठ सकते हैं। रोपवे प्रतिदिन 16 घंटे संचालित होगी और एक दिशा में प्रति घंटे 3,000 लोग यात्रा कर सकेंगे, जिससे दोनों दिशाओं में प्रति घंटे कुल 6,000 लोग यात्रा कर पाएंगे।
परियोजना का निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया जा रहा है। इंटरनेशनल मानक एजेंसी “सेंट्रल यूरोपियन नार्म्स” (CEN) के दिशानिर्देशों के तहत रोपवे की सुरक्षा, संचालन और रखरखाव सुनिश्चित किया जा रहा है। पहले चरण के पहले सेक्शन का इंस्टॉलेशन स्विस इंजीनियरों द्वारा किया गया है, जबकि ऑस्ट्रिया की कंपनी “रोप एक्सपर्ट्स” ने रोप पुलिंग का कार्य संभाला। इसके लिए यूरोप से विशेष उपकरण और ड्रोन भी आयात किए गए।
वाराणसी के यातायात सुधार के लिए यह परियोजना फ्लाईओवर, रिंग रोड, सड़क चौड़ीकरण और पार्किंग सुविधाओं के प्रयासों के बीच एक महत्वपूर्ण कदम है। परियोजना से यात्रियों को सुविधा, समय की बचत और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, रोपवे का संचालन स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुसार होगा। ट्रायल रन भी विशेषज्ञ टीम द्वारा किया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी या सुरक्षा संबंधी समस्या का पूर्वानुमान और समाधान किया जा सके।
इस तरह, वाराणसी जल्द ही आधुनिक अर्बन मोबिलिटी सिस्टम के माध्यम से अपनी ऐतिहासिक धरोहर और पर्यटन स्थलों के बीच तेजी से और सुविधाजनक यात्रा की सुविधा प्रदान करेगा।