समंदर में अब BRICS का शक्ति प्रदर्शन, अमेरिका से तनाव के बीच रूस-चीन और ईरान ने किया सैन्य अभ्यास
TV9 Bharatvarsh January 10, 2026 03:42 AM

अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच रूस, चीन और ईरान ने दक्षिण अफ्रीका के तटों पर एक संयुक्त नौसैनिक अभ्यास शुरू किया है. यह अभ्यास BRICS देशों की बढ़ती सैन्य सक्रियता और रणनीतिक एकजुटता का साफ संकेत माना जा रहा है. इस अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास को पहले Exercise MOSI III के नाम से जाना जाता था, लेकिन इस बार इसे नया नाम दिया गया है-Will for Peace.

अभ्यास की अगुवाई चीन कर रहा है, जबकि दक्षिण अफ्रीका मेजबान की भूमिका में है. हालांकि यह अभ्यास आधिकारिक तौर पर BRICS के नाम से नहीं किया जा रहा, लेकिन इसमें शामिल देशों की मौजूदगी इसे BRICS शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है. दक्षिण अफ्रीका, चीन और रूस BRICS के सदस्य हैं, जबकि ईरान हाल ही में इस समूह में शामिल हुआ है.

क्या है इस सैन्य अभ्यास का मकसद

दक्षिण अफ्रीकी नेशनल डिफेंस फोर्स के मुताबिक, इस अभ्यास का मकसद समुद्री सुरक्षा बढ़ाना, संयुक्त सैन्य प्रक्रियाओं को मजबूत करना और अहम शिपिंग रूट्स की रक्षा करना है. लेकिन जानकारों का मानना है कि इसका राजनीतिक संदेश सैन्य उद्देश्यों से कहीं बड़ा है.

इस अभ्यास के पीछे एक व्यावहारिक वजह भी बताई जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस वक्त दक्षिण अफ्रीका की नौसेना मजबूत स्थिति में नहीं है और लंबे समुद्री अभियानों की उसकी क्षमता सीमित है. फिलहाल दक्षिण अफ्रीका की नेवी ऐसे बड़े और लंबे अभ्यास खुद नहीं कर सकती. ऐसे में विदेशी नौसेनाओं के साथ अभ्यास उसे सीखने और क्षमता बढ़ाने का मौका देता है.

अभ्यास में क्या हो रहा है?

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, अभ्यास के दौरान अलग-अलग देशों के युद्धपोतों के बीच कम्युनिकेशन ड्रिल, सामूहिक ऑपरेशन और तालमेल पर जोर दिया जा रहा है. इसमें PASSEX (Passing Exercise) भी शामिल है, जिसमें जहाज तय फॉर्मेशन में चलने और आपसी समन्वय का अभ्यास करते हैं. विशेषज्ञ डीन विंग्रिन के अनुसार, ऐसे अभ्यास नौसेनाओं के लिए जरूरी होते हैं क्योंकि खुले समुद्र में किसी भी देश को अकेले काम नहीं करना पड़ता. आपसी तालमेल संकट के समय बेहद अहम होता है.

अमेरिका को क्या संदेश?

रूस पहले ही अमेरिका, यूरोप और नाटो के साथ टकराव की स्थिति में है. ईरान पश्चिमी प्रतिबंधों से जूझ रहा है. अभी ईऱान में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं, अमेरिका ने भी दखल देने तक की बात कह दी है, जिससे ईऱान में तख्तापलट की चर्चाएं तेज हैं. जबकि चीन अमेरिका से रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में उलझा हुआ है.

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