कौशाम्बी में साकार हो रहा 'मिनी एशिया': ₹23 करोड़ की लागत से बनेगा भव्य बुद्ध थीम पार्क
Tarunmitra January 10, 2026 06:42 AM

कौशाम्बी |उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक जनपद कौशाम्बी जल्द ही वैश्विक बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर एक नई आभा के साथ चमकने वाला है। राज्य पर्यटन विभाग यहाँ 11 हेक्टेयर के विस्तृत क्षेत्र में 'बुद्ध थीम पार्क' का निर्माण कर रहा है, जो न केवल अध्यात्म का केंद्र होगा, बल्कि कला और संस्कृति का अनूठा संगम भी बनेगा। ₹22.93 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को इस वर्ष के अंत तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस पार्क को तेलंगाना के प्रसिद्ध 'बुद्धवनम' की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। इसका सबसे मुख्य आकर्षण 'बुद्धचरित वनम' होगा, जहाँ मूर्तियों के माध्यम से भगवान बुद्ध के जन्म से लेकर महापरिनिर्वाण तक की जीवन यात्रा को जीवंत किया जाएगा।यह परियोजना कौशांबी को वैश्विक बौद्ध सर्किट में सशक्त स्थान दिलाएगी। इससे क्षेत्रीय पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाने में मदद मिलेगी।इस पार्क की विशिष्टता इसकी 'स्तूप गैलरी' होगी। यहाँ दुनिया के विभिन्न देशों की बौद्ध वास्तुकला को एक साथ देखा जा सकेगा श्रीलंका, थाईलैंड, दक्षिण कोरिया, म्यांमार, नेपाल, तिब्बत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के 13 प्रतिष्ठित स्तूप। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के प्रमुख बौद्ध स्थलों का प्रतिनिधित्व। धर्मचक्र, अभय और भूमिस्पर्श जैसी विभिन्न मुद्राओं पर आधारित एक अत्याधुनिक मेडिटेशन सेंटर।कौशाम्बी में पर्यटकों की बढ़ती संख्या इस परियोजना की प्रासंगिकता को सिद्ध करती है। आंकड़ों के अनुसार 2025 में कुल पर्यटक 23.19 लाख वहीं विदेशी पर्यटक 28840 रही । प्रमुख सचिव (पर्यटन) अमृत अभिजात के अनुसार, कौशाम्बी का भगवान बुद्ध से गहरा संबंध रहा है। तथागत ने यहाँ अपना छठा और नौवां 'वर्षावास' व्यतीत किया था। विकास कार्यों में इसी ऐतिहासिक प्रामाणिकता और आधुनिक सुविधाओं के समन्वय पर जोर दिया जा रहा है। और भगवान बुद्ध के पूर्व जन्मों की कथाओं का चित्रण के साथ शांति और आत्म-चिंतन के लिए समर्पित विशेष क्षेत्र। स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, हस्तशिल्प और आतिथ्य क्षेत्र में नए अवसर प्रदान होगे।

जिले वासियों का कहना है कि थीम पार्क न केवल भगवान बुद्ध के करुणा संदेश को नई पीढ़ी तक पहुँचाएगा, बल्कि कौशाम्बी को अंतरराष्ट्रीय शोधार्थियों और शांति प्रेमियों के लिए 'मक्का' के रूप में स्थापित करेगा।

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